Coronavirus Vaccine: दुनिया भर में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच रूस ने कोविड-19 की वैक्सीन के सफलतापूर्वक परीक्षण का दावा किया है। रूस के मुताबिक उनकी वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल में सफल रही है। तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में भी रूस द्वारा कोरोना की वैक्सीन बनाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन तमाम दावों के बीच रूस ने यह बताया ही नहीं कि अभी उसने वैक्सीन के सिर्फ पहले चरण का ट्रायल पूरा किया है। जबकि दूसरे चरण का ट्रायल इसी सप्ताह शुरू हुआ है और तीसरे चरण का ट्रायल कब होगा इसका कुछ अता-पता नहीं है।
रूस जिस वैक्सीन के सफल परीक्षण का दावा कर रहा है उसे गेमली इंस्टिट्यूट ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने रूस के रक्षा मंत्रालय के सहयोग से तैयार किया है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक इस वैक्सीन के पहले चरण का ह्यूमन ट्रायल 18 जून को शुरू हुआ था और इसमें 18 वॉलंटियर्स ने हिस्सा लिया था। ये सभी वॉलंटियर रूसी सेना के थे। इन्हीं पर वैक्सीन का ट्रायल किया गया।
अलग-अलग चरण में ट्रायल का क्या है महत्व?
किसी भी वैक्सीन के पहले चरण के ह्यूमन ट्रायल में एक छोटे ग्रुप पर वैक्सीन की सुरक्षा और सहनशीलता का ट्रायल किया जाता है। इसी तरह दूसरे चरण के ट्रायल में वैक्सीन की दक्षता और प्रति रक्षात्मकता (Efficiency and Immunology) आंकी जाती है। इस चरण में वैज्ञानिक देखते हैं कि वैक्सीन का वैसा नतीजा मिल रहा है या नहीं जिसकी उन्हें अपेक्षा है और वैक्सीन का कितना डोज देना ठीक रहेगा।
इसके बाद तीसरे चरण का ट्रायल होता है। किसी भी वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल में सफल होने के बगैर मंजूरी नहीं मिलती है। तीसरे चरण के ट्रायल में हजारों वॉलिंटियर्स का चयन किया जाता है और देखा जाता है कि वैक्सीन कितनी असरदार है। इस प्रक्रिया में कई महीने लगते हैं। अब हम रूस की वैक्सीन की बात करें तो अभी इसका पहले चरण का ट्रायल पूरा हुआ है। दूसरे चरण और तीसरे चरण के ट्रायल के नतीजे आने बाकी हैं। इसकी कोई गारंटी नहीं है कि वैक्सीन दूसरे और तीसरे चरण में सफल ही हो।
