Covid-19 New Strain: ब्रिटेन में कोविड-19 का नया वैरिएंट मिलने से दुनिया भर के लोगों की चिंता बढ़ गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये स्ट्रेन बेहद तेजी से लोगों के बीच फैल रहा है। उनके मुताबिक कोरोना वायरस का ये प्रकार पहले से 70 प्रतिशत ज्यादा संक्रामक है। बता दें कि ये नया स्ट्रेन दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड में सबसे पहले सितंबर महीने में देखा गया था। इस वायरस के खतरनाक प्रकार को मद्देनजर रखते हुए ब्रिटेन के कई देशों में लॉकडाउन लगा दिया गया है। इतना ही नहीं, दुनिया के बाकी देशों ने यूरोपियन देशों की आवाजाही बंद कर दी है।

भारत में नहीं मिला है एक भी मामला: देश में भी कोविड-19 के बढ़ते मरीजों की संख्या चिंतादायक है। भारत में कोरोना संक्रमित 1 करोड़ से भी अधिक हो चुके हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक ब्रिटेन में पाया गया ये स्ट्रेन अब तक भारत में नहीं देखा गया है। उनका कहना है कि ये खतरनाक स्ट्रेन अब तक कुछ ही देशों तक पहुंचा है इसलिए ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।

क्या होता वायरस म्यूटेशन: वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रिटेन में कोविड-19 के वायरस ने म्यूटेट करना शुरू कर दिया है। इस कारण ही ये और भी ज्यादा खतरनाक हो गया है। म्यूटेशन को अगर आसान शब्दों में बताया जाए तो इसका मतलब बदलाव होता है। इस कारण वायरस के क्रम में चेंजेज आते हैं। सार्स सीओवी-2 एक सिंगल RNA वायरस है। इसके अंतर्गत मॉलीक्यूल्स का पैटर्न निर्धारित होता है, अगर इसमें कुछ बदलाव होता है तो उसे म्यूटेशन कहते हैं। माना जाता है कि जब वायरस कॉपी बना रहा होता है, उस वक्त कोई गलती म्यूटेशन के लिए जिम्मेदार होता है।

कितना खतरनाक है: वैज्ञानिकों के मुताबिक वायरस के इस नए प्रकार के बारे में अभी अधिक जानकारी नहीं मिल पाई है। हालांकि, उन्होंने अनुमान लगाया है कि ये स्ट्रेन लोगों में 70 फीसदी ज्यादा तेजी से फैल रहा है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों को इस म्यूटेशन के प्रति अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

क्या हैं इससे बचाव के उपाय: डॉक्टरों का मानना है कि इस नए स्ट्रेन से संक्रमित लोगों में कोई अलग लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। ऐसे में इस स्ट्रेन से डरना नहीं चाहिए, न ही घबराना चाहिए। वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार इससे मरने की संभावना ज्यादा नहीं है। पर ट्रांसमिशन ज्यादा बढ़ सकता है इसलिए कोताही अधिक बरतने की जरूरत है। इसके अलावा, एक्सपर्ट्स के मुताबिक कोविड-19 से इलाज के लिए बनाए जा रहे वैक्सीन नए स्ट्रेन पर भी असरदार साबित हो सकते हैं।