मजबूत हड्डियों के लिए कैल्शियम और विटामिन D का सेवन बेहद जरूरी है। कैल्शियम और विटामिन D का शरीर में काम करने का तरीका अलग-अलग होता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हड्डियों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए इन दोनों पोषक तत्वों का संतुलन बेहद जरूरी है। विज्ञान के अनुसार, कैल्शियम और विटामिन-D दोनों पार्टनर्स हैं। कैल्शियम हड्डियों की ईंट है, जो उन्हें ढांचा प्रदान करता है जबकि विटामिन-D वो चाबी है, जिसके बिना आपका शरीर भोजन से कैल्शियम को सोख (Absorb) ही नहीं सकता। अगर आप ढेर सारा कैल्शियम खाते हैं लेकिन शरीर में विटामिन-D कम है, तो वह कैल्शियम हड्डियों तक पहुंचने के बजाय शरीर से बाहर निकल जाता है।
कैल्शियम और विटामिन D अक्सर एक साथ लिए जाते हैं, लेकिन शरीर में इनकी भूमिका अलग होती है। आपको बता दें कि कैल्शियम एक मिनरल है, जो हड्डियों की संरचना को मजबूत बनाता है और उन्हें मजबूती देता है। यह सीधे तौर पर हड्डियों की ताकत से जुड़ा होता है। बात करें विटामिन D की भूमिका की तो ये शरीर को कैल्शियम को सही तरीके से अवशोषित (Absorb) करने में मदद करता है। अगर विटामिन D की कमी हो, तो कैल्शियम लेने के बावजूद शरीर उसे पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाता।
रिसर्च बताती हैं कि हड्डियों की सेहत के लिए कोई एक दूसरे से बेहतर नहीं है। कैल्शियम हड्डियों को बनाता है और उन्हें मजबूत करता है। जबकि विटामिन D यह सुनिश्चित करता है कि कैल्शियम शरीर में सही तरह से काम करें। डॉ. टी.केया बाज़िन एक क्लिनिकल फार्मासिस्ट और अनुभवी हेल्थ कंटेंट राइटर हैं ने एक लेख में बताया है कि विटामिन डी और कैल्शियम का संतुलित सेवन करना जरूरी है। इन दोनों का कॉम्बिनेशन में सेवन करने से बुजुर्गों में फ्रैक्चर का खतरा कम हो सकता है। किसी एक की कमी से हड्डियां कमजोर और भंगुर हो सकती हैं, जबकि ज्यादा मात्रा लेने से साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।
कैल्शियम कैसे बनाता है हड्डियों को मजबूत?
अगर शरीर को पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलता, तो वह खून में कैल्शियम का स्तर बनाए रखने के लिए हड्डियों से कैल्शियम निकालने लगता है। लंबे समय तक ऐसा होने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों का भुरभुरा होना है जिसकी वजह से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।
कैल्शियम के प्रमुख फूड सोर्स
कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए आप डाइट में दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें। फोर्टिफाइड दूध, सीरियल्स और ऑरेंज जूस, हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, केल, टोफू, डिब्बाबंद मछली जैसे सार्डिन, सैल्मन का सेवन करें। बिना विटामिन D के कैल्शियम लेने से उसका अवशोषण ठीक से नहीं हो पाता।
विटामिन D क्यों है हड्डियों के लिए जरूरी?
विटामिन D एक फैट-सॉल्युबल विटामिन है, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाता है। अगर विटामिन D की कमी हो, तो कैल्शियम लेने के बावजूद फायदा नहीं मिलता।
विटामिन D के सोर्स
बॉडी में विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए आप धूप में बैठें। धूप विटामिन डी का सबसे बेहतर और प्राकृतिक स्रोत है। डाइट में फैटी फिश जैसे सैल्मन, टूना, मैकेरल, अंडे की ज़र्दी, फोर्टिफाइड दूध, जूस और सीरियल्स का सेवन करें। आप डॉक्टर की सलाह के मुताबिक सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं। सिर्फ विटामिन D लेना भी तब तक असरदार नहीं होता, जब तक डाइट में पर्याप्त कैल्शियम न हो।
कितनी मात्रा जरूरी है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक विटामिन डी और कैल्शियम की सही मात्रा लेना बेहद अहम है।
विटामिन D:
70 साल से कम उम्र के बच्चों और वयस्कों के लिए रोज़ाना 600 IU
कैल्शियम
50 साल तक के लोगों के लिए रोज़ाना 1,000 से 1,300 mg
हालांकि, उम्र, सेहत और लाइफस्टाइल के अनुसार ज़रूरत अलग हो सकती है। सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
निष्कर्ष
मजबूत और स्वस्थ हड्डियों के लिए कैल्शियम और विटामिन D दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। किसी एक पर निर्भर रहना सही नहीं है। संतुलित डाइट, धूप में समय और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट का सेवन हड्डियों की सेहत का सही फार्मूला है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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