दिन की शुरुआत अक्सर लोग चाय या कॉफी से करते हैं। किसी को दूध, चाय पत्ती और चीनी वाली चाय पसंद होती है, तो कोई ब्लैक टी या कॉफी पीना पसंद करता है। चाय या कॉफी का सेवन कुछ समय के लिए सुस्ती और नींद को जरूर दूर कर देता है, लेकिन इसमें मौजूद कैफीन शरीर पर नकारात्मक असर भी डाल सकता है। सुबह-सुबह खाली पेट कैफीन युक्त चाय या कॉफी पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन बढ़ सकता है, क्योंकि कैफीन डाइयूरेटिक होता है, यानी यह बार-बार पेशाब की इच्छा बढ़ाता है। इसके अलावा, ये पेट की एसिडिटी बढ़ा सकता है, गैस और जलन की समस्या पैदा कर सकता है और कुछ लोगों में दिल की धड़कन तेज होने, बेचैनी और थकान जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं।
लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा कैफीन लेने से नींद का पैटर्न बिगड़ सकता है, हार्मोनल बैलेंस प्रभावित हो सकता है और शरीर की नेचुरल एनर्जी पर निर्भरता कम हो जाती है। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स सुबह की शुरुआत गुनगुने पानी, हर्बल चाय या कैफीन-फ्री आयुर्वेदिक ड्रिंक से करने की सलाह देते हैं, जिससे शरीर को बिना नुकसान पहुंचाए धीरे-धीरे एक्टिव किया जा सके और दिनभर एनर्जी बनी रहे।
आयुर्वेदिक डॉक्टर रूपाली जैन ने दिन की शुरूआत एक हेल्दी और आयुर्वेदिक चाय से करने की सलाह दी है। एक्सपर्ट ने बताया अगर आप चाय पीना पसंद करते हैं, तो यह खास आयुर्वेदिक चाय आपके लिए है। इस चाय की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें न तो चायपत्ती होती है और न ही चीनी। ये चाय कर्नाटक की पारंपरिक हेल्दी ड्रिंक है, जिसे काशाय (Kashaya) भी कहा जाता है। इसके सभी घटक आसानी से किचन में मिल जाते हैं जिसका घर में आसानी से पाउडर बनाकर रोजाना इसका सेवन किया जा सकता है। यह चाय आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारियों की रोकथाम करने में असरदार साबित होती है। इसका सेवन करने से दिल की सेहत में सुधार होता है और वजन भी कंट्रोल रहता है। आइए जानते है कि ये चाय कैसे सेहत पर असर करती है।
आयुर्वेदिक चाय के 5 बड़े फायदे
पाचन अग्नि को मजबूत बनाती है ये चाय
यह चाय शरीर की पाचन अग्नि को सक्रिय करती है, जिससे भूख न लगना, जल्दी पेट भरना, गैस और भारीपन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। यह पित्त को बढ़ाए बिना पाचन सुधारती है।
बॉडी से निकालती है टॉक्सिन
अधपचा भोजन आयुर्वेद में ‘आम’ कहलाता है, जो धीरे-धीरे ज़हर जैसा असर करता है। यह चाय आम को पचाने में मदद करती है और IBS, स्किन रोग, सूजन और ऑटोइम्यून जैसी समस्याओं के खतरे को कम करती है।
इम्यूनिटी को मजबूत करती है
मुलेठी, हल्दी, काली मिर्च और लौंग जैसे तत्व फेफड़ों को मजबूत करते हैं और शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं। सर्दी, खांसी, गले के संक्रमण और कफ की समस्या में ये चाय फायदेमंद है।
लाइफस्टाइल डिज़ीज़ में असरदार
मोटापा, पेट की चर्बी, कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर, PCOD, थायरॉइड और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं में यह चाय असरदार मानी जाती है।
तीनों दोषों का संतुलन बनाए रखती है
यह चाय वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित करने में मदद करती है। यही कारण है कि इसे लगभग हर प्रकृति का व्यक्ति पी सकता है।
आयुर्वेदिक चाय (काशाय) बनाने की रेसिपी
सामग्री
- धनिया के बीज – आधा कटोरी
- साबुत जीरा – एक चौथाई कटोरी
- सौंफ – एक चौथाई कटोरी
- साबुत काली मिर्च – 1 से 1½ चम्मच
- लौंग – 1 चम्मच
- इलायची – 1 चम्मच
- जायफल – आधा
- सूखा अदरक पाउडर – 1 चम्मच
- मुलेठी पाउडर – 1 चम्मच
- अश्वगंधा पाउडर – 1 चम्मच
- हल्दी पाउडर – ¼ से ½ चम्मच
पाउडर बनाने की विधि
धनिया, जीरा और सौंफ को धीमी आंच पर अलग-अलग हल्का भून लें। इन्हें ज्यादा जलाना नहीं है। इसके बाद काली मिर्च, लौंग, इलायची और जायफल को भी हल्का रोस्ट करें। अब सभी भुनी हुई सामग्री को मिक्सर में डालें। जायफल को छोटे टुकड़ों में काटकर डालें ताकि अच्छे से पिस जाए। फिर सूखा अदरक, मुलेठी, अश्वगंधा और हल्दी डालकर बारीक पाउडर बना लें। अगर कुछ दाने मोटे रह जाएं तो छानकर दोबारा पीस लें। इस पाउडर को एयर टाइट डिब्बे में स्टोर करें।
चाय बनाने का तरीका
- 2 कप पानी उबालें
- उसमें 1 चम्मच तैयार पाउडर डालें
- चाहें तो थोड़ा गुड़ डाल सकते हैं। गुड़ के साथ दूध न मिलाएं।
- पानी को उबालकर 1 कप रह जाने दें
- छानकर पिएं
- अगर दूध वाली चाय पसंद हो, तो गुड़ की जगह मिश्री का इस्तेमाल करें। डायबिटीज़ के मरीज मिठास न डालें।
चाय पीने का सही समय
सुबह की सामान्य चाय की जगह इस आयुर्वेदिक चाय का सेवन करें। नाश्ते के साथ बिना दूध की चाय पीना ज्यादा बेहतर माना जाता है।
निष्कर्ष
यह पारंपरिक आयुर्वेदिक चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि सेहत को संतुलन में रखने का आसान तरीका है। नियमित चाय की जगह अगर इसे अपनाया जाए, तो पाचन, इम्यूनिटी और लाइफस्टाइल से जुड़ी कई समस्याओं में फायदा मिल सकता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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