मुंह के छाले सुनने में भले ही एक छोटी समस्या लगे, लेकिन इनका दर्द इंसान का खाना-पीना और बोलना तक दूभर कर देता है। अक्सर हम इन छालों को सिर्फ एक जख्म समझकर मरहम लगाने लगते हैं, जबकि आयुर्वेद के अनुसार मुंह के छालों का सीधा संबंध हमारे पेट की सेहत से है। जब पेट में अत्यधिक गर्मी बढ़ जाती है या पाचन तंत्र खराब होता है तो शरीर इसका संकेत छालों के रूप में देता है। रिसर्च बताती है कि 80% मामलों में मुंह के छाले पेट की खराबी या Gastrointestinal (GI) समस्याओं का संकेत होते हैं। जर्नल ऑफ ओरल मेडिसिन के शोध के अनुसार विटामिन, आयरन और फोलिक एसिड की कमी जो अक्सर खराब पाचन के कारण होती है छालों का मुख्य कारण बनती है। आयुर्वेद के अनुसार ‘पित्त’का असंतुलन और कब्ज पेट में गर्मी बढ़ाते हैं, जो छालों के रूप में बाहर आते हैं।
अक्सर लोग छालों का इलाज अंग्रेजी दवाओं और जैल से करते हैं, जो केवल कुछ समय के लिए दर्द को दबाते हैं। लेकिन आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य बालकृष्ण ने एक बेहद सरल और अचूक घरेलू नुस्खा साझा किया है। उनके अनुसार हमारे आसपास ही मौजूद कुछ खास फलों के पत्तों में वो शक्ति है जो न केवल छालों के दर्द को मिनटों में शांत कर सकते हैं, बल्कि पेट के अल्सर और कब्ज जैसी जड़ पर भी वार करते हैं। आइए जानते हैं उस जादुई पत्ती के बारे में और उसके इस्तेमाल का सही तरीका जिससे आपके पुराने से पुराने छाले भी रातों-रात गायब हो सकते हैं।
अमरूद और जामुन के पत्तों से करें मुंह के छालों का इलाज
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य बालकृष्ण ने मुंह के छालों का इलाज दो तरह के पत्तों से करने की सलाह दी है। अमरूद और जामुन के पत्ते मुंह के छालों को दूर करने में असरदार साबित होते हैं। जर्नल ऑफ एथ्नो फार्माकोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार अमरूद के पत्तों में Tannins और Flavonoids होते हैं। ये तत्व बैक्टीरिया से लड़ते हैं और घाव को तेजी से भरते हैं। इन पत्तों को चबाने से निकलने वाला रस एक प्राकृतिक ‘एस्ट्रिंजेंट’ की तरह काम करता है, जो छालों की सूजन (Inflammation) को तुरंत कम करता है।
Journal of Ethnopharmacology में प्रकाशित शोध के अनुसार, जामुन के पत्तों के अर्क में मजबूत एंटी-माइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। यह मुंह के उन बैक्टीरिया को खत्म करता है जो छालों में संक्रमण पैदा कर दर्द बढ़ाते हैं। साथ ही, इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण छालों की सूजन और लालिमा को कम करते हैं। जामुन के पत्ते पाचन एंजाइम्स को उत्तेजित करते हैं। रिसर्च बताती है कि इसके पत्तों में गैस्ट्रो-प्रोटेक्टिव गुण होते हैं। चूंकि छाले अक्सर पेट की गर्मी और अपच से होते हैं, जामुन के पत्ते पेट को ठंडा कर छालों के मूल कारण को खत्म करते हैं।
आयुर्वेद में जामुन के पत्ते कैसे करते हैं छालों का इलाज
अगर आप मुंह के छालों से बार-बार परेशान रहते हैं, तो जामुन के पत्ते एक असरदार घरेलू उपाय साबित हो सकते हैं। आयुर्वेद में जामुन के पत्तों को प्राकृतिक एंटीसेप्टिक माना गया है। इनमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मुंह में पनप रहे हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं, जिससे छाले जल्दी ठीक होने लगते हैं।
इसके इस्तेमाल के लिए जामुन के ताजे पत्तों को पानी में अच्छी तरह उबाल लें और इस पानी के गुनगुना होने पर दिन में दो बार गरारे करें। इससे मुंह की जलन, दर्द और सूजन में राहत मिलती है। इसके अलावा, जामुन के पत्ते पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं। कमजोर पाचन और पेट की गर्मी को मुंह के छालों का बड़ा कारण माना जाता है, ऐसे में ये उपाय अंदरूनी कारण को भी ठीक करने में मदद करता है। नियमित उपयोग से छालों की समस्या में तेजी से सुधार देखा जा सकता है।
आयुर्वेद में अमरूद के पत्ते कैसे करते हैं छालों का इलाज
आयुर्वेद में अमरूद के पत्तों को मुंह के छालों के इलाज के लिए बेहद असरदार माना गया है। अमरूद के पत्तों में प्राकृतिक रूप से एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने और छालों को जल्दी भरने में मदद करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार मुंह के छाले अक्सर पित्त दोष, पेट की गर्मी और कमजोर पाचन के कारण होते हैं। अमरूद के पत्ते पित्त को शांत करने का काम करते हैं और मुंह में होने वाली जलन,दर्द और सूजन को कम करते हैं। इसके अलावा ये पत्ते मुंह के घावों पर एक प्राकृतिक सुरक्षा परत बनाते हैं, जिससे छाले फैलते नहीं हैं।
अमरूद के पत्तों से छालों का इलाज कैसे करें
5–6 ताजे अमरूद के पत्ते लें और उन्हें अच्छी तरह धो लें। इन पत्तों को एक गिलास पानी में उबालें। पानी हल्का गुनगुना होने पर इस से दिन में 2 बार गरारे करें।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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