Ayurvedic Chyawanprash: आयुर्वेद में च्यवनप्राश को सबसे शक्तिशाली औषधियों में से एक माना जाता है। यह कोई साधारण जेली या जैम नहीं, बल्कि एक रसायन (Rejuvenating Tonic) है, जो शरीर को अंदर से मज़बूत बनाता है, इम्यूनिटी बढ़ाता है और मन को शांत करता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार च्यवनप्राश की उत्पत्ति तब हुई जब उम्र और कमजोरी से पीड़ित च्यवन ऋषि को अश्विनी कुमारों ने एक विशेष हर्बल टॉनिक के माध्यम से पुनर्जीवित किया। वही पारंपरिक नुस्खा आगे चलकर च्यवनप्राश के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

च्यवनप्राश एक ऐसी जड़ी बूटियों का मिश्रण है जो आंवला,अश्वगंधा,शतावरी,गिलोय, बेल, मुलेठी, पिप्पली और गाय के घी से तैयार किया जाता है। इसका मूल आधार आंवला Amla है। रिसर्च बताती है कि 100 ग्राम आंवला में संतरे की तुलना में 20 गुना ज्यादा विटामिन C होता है। आंवला में मौजूद सभी हर्ब्स शरीर की सातों धातुओं यानी रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, शुक्र को पोषण देते हैं।

भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र (Hansa Yogendra) के मुताबिक मार्केट में मिलने वाला च्यवनप्राश अक्सर बहुत मीठा, चीनी, प्रिज़र्वेटिव और सिंथेटिक फैट से भरा होता है। इसीलिए घर का बना च्यवनप्राश खाएं। ये ज्यादा शुद्ध, ज्यादा असरदार, बिना प्रिज़र्वेटिव और शरीर के लिए हल्का होता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि रोज इस आयुर्वेदिक च्यवनप्राश को खाने से सेहत पर कैसा होता है असर। 

इम्यूनिटी होती है मजबूत

सर्दी में रोज इस आयुर्वेदिक च्यवनप्राश को रोज खाएं इम्यूनिटी मजबूत रहेगी। च्यवनप्राश में आंवला, अश्वगंधा, गिलोय, पिप्पली और अन्य कई एंटीऑक्सिडेंट व इम्यून-बूस्टिंग जड़ी–बूटियां होती हैं। ये शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाती हैं, जिससे शरीर वायरल, बैक्टीरियल और मौसमी संक्रमणों से लड़ने में सक्षम होता है। नियमित सेवन से बार-बार होने वाले फ्लू, बुखार और कमजोरी से बचाव होता है।

सांस संबंधी समस्याओं में मिलेगी राहत 

रोज सर्दी में च्यवनप्राश का सेवन करने से फेफड़े और श्वसन तंत्र मजबूत होता है।  इसमें मौजूद गिलोय, पिप्पली और मुलेठी हवा की नलियों को साफ रखते हैं। इसका सेवन करने से खांसी-जुकाम, एलर्जी, सर्दी और सांस लेने में तकलीफ में फायदा मिलता है। सर्दियों में इसका असर और भी अधिक दिखाई देता है क्योंकि यह शरीर में गर्माहट पैदा करता है।

पाचन शक्ति को बनाता है मजबूत 

च्यवनप्राश अग्नि (Digestive Fire) को बढ़ाता है, जिससे भोजन का पाचन बेहतर तरीके से होता है। यह पाचन तंत्र को संतुलित करता है, भूख कंट्रोल करता है। इसका सेवन करने से पेट की गैस, कब्ज़ तथा अपच जैसी समस्याओं से निजात मिलती है। इसका सेवन करने से भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों का अवशोषण भी बेहतर होता है।

याददाश्त होती है तेज

च्यवनप्राश में मौजूद अश्वगंधा, पिप्पली, शतावरी और ब्राह्मी जैसी जड़ी-बूटियां दिमाग को शांत और एक्टिव रखती हैं। इसका सेवन करने से मानसिक थकान कम होती है और एकाग्रता और ध्यान बढ़ता है। सर्दी में रोज इसे खाने से स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल कम होता है।  नियमित सेवन से स्मरण शक्ति और फोकस दोनों में सुधार आता है।

एनर्जी और स्टैमिना होता है बूस्ट

जड़ी बूटियों से तैयार ये च्यवनप्राश शरीर की सातों धातुओं यानी रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, शुक्र को पोषण देता है। ये धातुएं मजबूत होने पर शरीर में स्वाभाविक रूप से ताकत, ऊर्जा और सहनशक्ति बढ़ती है। इसका सेवन करने से बॉडी की कमजोरी, थकान दूर होती है। जिन लोगों की कमज़ोर इम्यूनिटी है उनके लिए ये फायदेमंद है। 

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