फैटी लिवर एक ऐसी परेशानी है जो आजकल बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक को हो रही है। अगर किसी बच्चे का अल्ट्रासाउंड किया जाए तो हल्का-फुल्का फैटी लिवर की परेशानी उनमें भी दिखाई देती है। डॉक्टर अक्सर इस परेशानी का इलाज लाइफस्टाइल में बदलाव करके करते हैं। अब बड़ा सवाल ये है कि आखिर फैटी लिवर के केस इतने ज्यादा क्यों बढ़ रहे हैं?
प्रसिद्ध भारतीय गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और हेपेटोलॉजिस्ट डॉक्टर शिव कुमार सरीन ने बताया लिवर की परेशानी का सबसे बड़ा कारण बढ़ता वजन है। लोगों को अपने शरीर का सही वजन पता ही नहीं होता। जैसे कार चलाते हुए आप जानते हैं कि टायर में कितनी हवा चाहिए, वैसा ही शरीर के लिए भी एक आइडियल वेट होना चाहिए। लेकिन लोग इस पर ध्यान नहीं देते। अगर परिवार में किसी को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, कोलेस्ट्रॉल या कैंसर जैसी समस्याएं हैं तो वजन को और 5 किलो कम रखना जरूरी है। डॉक्टर के मुताबिक वजन को कंट्रोल करके फैटी लिवर का खतरा काफी कम हो जाता है।
लिवर में कुछ भी परेशानी होने पर बॉडी में उसके लक्षण दिखने लगते हैं जैसे पेट के दाहिने ऊपर दर्द या भारीपन, लगातार थकान और कमजोरी, जी मिचलाना या उल्टी जैसा महसूस होना, भूख कम लगना, पेट फूलना, गैस या अपच, वजन बढ़ना या अचानक कम होना, आंखों और स्किन का पीलापन (जॉन्डिस), गहरा पेशाब और बहुत हल्का मल, पैरों, टांगों या पेट में सूजन, स्किन पर लाल छोटे दाग, आसानी से चोट लगना या खून बहना, शरीर या स्किन में तेज खुजली, दिमागी भ्रम, चक्कर या याददाश्त पर असर जैसे लक्षण दिखते हैं। लिवर को हेल्दी रखने के लिए और फैटी लिवर से छुटकारा पाने के लिए डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करना जरूरी है।
डाइट से लिवर से जुड़ी बीमारियों का काफी हद तक इलाज किया जा सकता है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य बालकृष्ण ने बताया अगर आपका लिवर बड़ा हुआ है,फैटी लिवर की परेशानी है और लिवर में सूजन है तो आप इन सब परेशानियों का इलाज मूली से करें। अगर आपका लिवर बड़ा है,फैटी लिवर है तो आप मूली को चीर कर चार टुकड़े कर लें और उसमें 3-4 ग्राम नौसादर नमक छिड़क कर रात को उसे खुले आसमान के नीचे रख दें और सुबह मूली से निकला हुआ पानी पी लें और मूली को खा लें। आइए जानते हैं कि मूली कैसे लिवर से जु़ड़ी बीमारियों का इलाज करती है और फैटी लिवर को भी नॉर्मल करती है।
मूली कैसे लिवर का इलाज करती है?
मूली की सब्जी लिवर डिटॉक्सिफिकेशन को तेज करती है। मूली में पाए जाने वाले सल्फर कंपाउंड्स जैसे ग्लूकोसिनोलेट्स और इसोथायोसाइनेट्स लिवर के एंजाइम को एक्टिवेट करते हैं। यह एंजाइम्स फेज-1 और फेज-2 डिटॉक्सीफिकेशन प्रक्रिया तेज करते हैं जिससे अमोनिया, अल्कोहल के केमिकल, दवाइयों के टॉक्सिन, फैट जमा होने वाले तत्व तेजी से लिवर से बाहर निकलते हैं। मूली खाने से फैटी लिवर का भी इलाज होता है। फैटी लिवर में लिवर सेल्स के आसपास फैट जमा हो जाता है। मूली में मौजूद फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, डिटॉक्स एजेंट फैट मेटाबॉलिज्म सुधारते हैं जिससे लिवर में फैट जमा कम होता है।
इसका सेवन करने से एंजाइम का स्तर बेहतर होता है। ये सब्जी ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करती है और पित्त (Bile) के प्रवाह में सुधार करती है। मूली एक ऐसा choleretic food है जो पित्त का उत्पादन बढ़ाती है जिससे पाचन सुधरता है, फैट टूटता है और लिवर पर दबाव कम होता है। जो लोग भारी खाना खाते हैं या जिनका लिवर कमजोर है उन्हें मूली बहुत फायदा देती है। मूली में एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रॉपर्टी भी मौजूद है। मूली में विटामिन-C, एंथोसाइनिन और पॉलीफेनॉल्स होते हैं जो लिवर में सूजन कंट्रोल करते हैं। इसका सेवन करने से ऑक्सीडेटिव डैमेज कम होता हैं। यह प्रक्रिया लिवर सेल्स की हीलिंग तेज करती है।
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