देश के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। हवा में धूल और धुएं की मात्रा इतनी बढ़ गई है कि सांस लेना भी लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है। मजबूरी में लोग एन-95 मास्क पहन रहे हैं और घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ ये उपाय काफी नहीं हैं। अगर लाइफस्टाइल में कुछ जरूरी बदलाव किए जाएं, तो लंबे समय तक प्रदूषण के असर को कम किया जा सकता है। तो आइए एम्स के डॉक्टर विजय हड्डा (प्रोफेसर डिपार्टमेंट ऑफ पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन) से जानते हैं कि वायु प्रदूषण के असर से कैसे बचा जा सकता है।

वायु प्रदूषण क्यों बन रहा है जानलेवा?

वायु प्रदूषण का असर सिर्फ आंखों में जलन या गले में खराश तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से फेफड़ों की गंभीर बीमारियां, अस्थमा, सीओपीडी, दिल से जुड़ी समस्याएं और इम्यून सिस्टम कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ता है।

हाइड्रेट रहना क्यों है जरूरी?

एम्स के प्रोफेसर डॉक्टर विजय हड्डा के अनुसार, वायु प्रदूषण शरीर में तनाव बढ़ाता है। इससे कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं ऑक्सीटोसिन नाम का हार्मोन तनाव को कम करने में मदद करता है, लेकिन प्रदूषण के कारण उसका संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे में शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी हो जाता है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर खुद को प्रदूषण के असर से बेहतर तरीके से बचा पाता है।

हाइड्रेट कैसे रहें?

डॉक्टरों के अनुसार, रोजाना खूब पानी पिएं। इसके साथ ही नारियल पानी और नींबू पानी को भी अपनी दिनचर्या में शामिल करें। ये न सिर्फ शरीर में पानी की कमी को पूरा करते हैं, बल्कि शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद करते हैं।

हेल्दी लाइफस्टाइल

डॉक्टर विजय हड्डा का कहना है कि हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर आप मास्क और एयर प्यूरीफायर से भी ज्यादा अपनी सेहत को सुरक्षित रख सकते हैं। सही खानपान और अच्छी दिनचर्या शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है।

खाने का रखें खास ध्यान

प्रदूषण से लड़ने के लिए डाइट का सही होना बहुत जरूरी है। खाने में ज्यादा से ज्यादा हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें। इसके अलावा विटामिन-सी से भरपूर फल जैसे संतरा, अमरूद और आंवला जरूर खाएं। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को प्रदूषण से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं।

AQI देखकर ही घर से निकलें

मैक्स हॉस्पिटल के वाइस चेयरमैन और हेड पल्मोनोलॉजी डॉक्टर विवेक नानगिया बताते हैं कि बाहर निकलने से पहले AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स चेक करना बहुत जरूरी है। जैसे हम मौसम देखकर कपड़े पहनते हैं, वैसे ही AQI देखकर अपनी एक्टिविटी तय करनी चाहिए।

AQI के अनुसार क्या करें और क्या न करें?

अगर AQI 200 से ऊपर है, तो बुजुर्ग, छोटे बच्चे, अस्थमा, सीओपीडी या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों को बाहर किसी तरह की फिजिकल एक्टिविटी नहीं करनी चाहिए। अगर AQI 300 से ऊपर चला जाए, तो स्वस्थ व्यक्ति को भी बाहर भारी शारीरिक गतिविधि से बचना चाहिए। वहीं AQI 400 पहुंचने पर यह हेल्थ इमरजेंसी की स्थिति मानी जाती है, जिसमें बाहर निकलना बिल्कुल नहीं चाहिए और घर के अंदर की हवा को भी साफ रखना जरूरी हो जाता है।

किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?

छोटे बच्चे, बुजुर्ग, फेफड़ों या दिल के मरीज और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को प्रदूषण के समय खास सावधानी बरतनी चाहिए। बिना जरूरत घर से बाहर निकलने से बचें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें। प्रदूषण के दिनों में सुबह-शाम टहलने से बचें। धूम्रपान बिल्कुल न करें। बच्चों को खुले मैदान में खेलने से रोकें। घर के अंदर साफ-सफाई का ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।

निष्कर्ष

वायु प्रदूषण आज एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। हालांकि इससे पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन सही जानकारी, सतर्कता और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अगर हम AQI पर नजर रखें और डॉक्टरों की सलाह मानें, तो इस जहरीली हवा के दौर में भी अपनी सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

आइए डाइटिशियन अर्चना जैन से जानते हैं कि रोजाना अजवाइन और दालचीनी का पानी पीने से शरीर को कौन-कौन से फायदे मिल सकते हैं। पूरी जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें।