टीवी के सबसे पॉपुलर शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा में चालू पांडे का किरदार करने वाले दयाशंकर पांडे आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है। कई बड़ी सफल फिल्मों का हिस्सा होने के साथ ही वे टीवी के चर्चित चेहरों में से भी एक हैं।

तारक मेहता का उल्टा चश्मा से पहले चालू पांडे यानी दयाशंकर पांडे ‘महिमा शनिदेव की’ शो कर काफी चर्चा में आए थे। लॉकडाउन में यह शो दोबारा दंगल टीवी पर प्रसारित किया जा रहा है। इस शो से जुड़ने का चालू पांडे का किस्सा भी दिलचस्प है। दयाशंकर पांडे ने अपने एक इंटरव्यू में शनिदेव से जुड़ने की कहानी का जिक्र करते हुए कहा था कि उनकी कुंडली में जब साढ़े साती चल रहा था, उसी वक्त उन्हें शनिदेव के लिए ऑफर आया था। उन्होंने कहा था कि शनिदेव के नाम से ही कई लोगों ने उन्हें डरा दिया था।

बकौल दयाशंकर पांडे, ‘एक वक्त मैं शाहब समसी साहब को असिस्ट करता था। एक दिन उनका कॉल आया कि माइथोलॉजिकल शो करोगे। मैंने उनसे कहा कि अच्छा रोल होगा तो करूंगा। दयाशंकर के ने बताया था कि समसी शो के क्रिएटिव डायरेक्टर थे। वे शिव सागर के ऑफिस ले गए। मैं उनके सामने 10 मिनट तक बैठा रहा। इसके बाद शिव सागर ने कहा कि तुम्हारा चेहरा भी शनिदेव जैसा लगता है। दो दिन बाद मेरा लुक टेस्ट हुआ और लीड रोल के लिए फाइनल हो गया।

दयाशंकर के मुताबिक जब उन्हें शनिदेव ऑफर हुआ तो कई लोगों ने उन्हें ये कहते हुए डरा दिया था कि शनिदेव का रोल कर रहा है। शनिदेव पर शो कम ही बनते हैं क्योंकि लोग उनसे डरते हैं। दयाशंकर ने कहा कहा था कि जब उन्हें शो मिला उनकी कुंडली में शनि की साढ़े साती चल रही थी। उन्होंने इस बाबत एक धर्मगुरु से सलाह भी ली थी। बकौल दयाशंकर जिस दौरान मुझे जब यह शो चल रहा था, उस वक्त मेरी कुंडली में शनि की साढ़े साती चल रही थी। मैंने अपने एक धर्मगुरू हैं, उनसे संपर्क किया तो वे बोले तुम भाग्यशाली हो कि साढ़े साती में तुम्हें यह शो करने का अवसर मिला।

बता दें दयाशंकर पांडे टीवी इंडस्ट्री से साल 1991 में जुड़े। वे तब Filmistan Studios का हिस्सा बनें और दूरदर्शन के शो ‘लेने के देने’ को असिस्ट करने लगे। उन्हीं दिनों दयाशंकर एक्टर बनने को लेकर संघर्ष भी कर रहे थे क्योंकि लेने के देने शो सिर्फ 10 दिनों के लिए ही शूट होता था। दयाशंकर टीवी सहित बड़े पर्दे का भी हिस्सा बनें और लगान, गंगाजल, स्वदेश और राजनीति जैसी बेहतरीन फिल्मों में एक्टिंग की। दयाशंकर का जन्म यूपी के भदोही जिले में हुआ है।