फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। वह अक्सर इंडस्ट्री और देश-विदेश से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय देते हुए नजर आते हैं। अब हाल ही में शाहरुख खान को लेकर बात की है। दरअसल, निर्माता-निर्देशक ने अभी तक अपने करियर में नागार्जुन, मनोज बाजपेयी और अमिताभ बच्चन समेत कई स्टार्स के साथ काम किया है और अब उन्होंने बताया है कि वह शाहरुख के साथ काम क्यों नहीं कर सकते। चलिए जानते हैं इस बारे में फिल्ममेकर ने क्या कहा।

किरदारों की डिमांड पर करते हैं कास्ट

राम गोपाल वर्मा का कहना है कि वह एक्टर्स को उनके स्टारडम के बजाय कहानी और उसके किरदारों की डिमांड के आधार पर कास्ट करते हैं। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी सभी फिल्मों में यही तरीका अपनाया गया। ‘सरकार’ से लेकर ‘सरकार 3’ तक। द हंस इंडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “अमिताभ का चेहरा असल में बहुत ही स्थिर है, जो इतने मशहूर एक्टर के लिए अजीब है।

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हालांकि, वह जिस तरह से वह अपनी आंखों और आवाज के उतार-चढ़ाव से बिना हिले-डुले अपनी बात कहते हैं, वह एक अनोखी बात है, क्योंकि इससे उन्हें एक अंदरूनी गरिमा, अंदरूनी संतुलन और क्लासीनेस मिलती है, जो बहुत-बहुत कम होता है। मेरी जानकारी में कोई दूसरा एक्टर ऐसा नहीं कर सकता, कम से कम इंडिया में तो नहीं।”

शाहरुख खान को लेकर क्या बोले फिल्ममेकर

इसके बात उन्होंने किंग खान के बारे में बात करते हुए कहा, “शाहरुख का स्टाइल उनके चार्म और हर चीज के मामले में बहुत अलग है। जिस तरह का सिनेमा देखकर मैं बड़ा हुआ, जिसने मुझ पर असर डाला, वे ‘दीवार’ (1975), ‘त्रिशूल’ (1978), और ‘जंजीर’ (1973) हैं। इसलिए मुझे अमिताभ बच्चन पसंद हैं। शाहरुख की रोमांटिक फिल्में मेरे टाइप की फिल्में नहीं हैं। इसलिए शाहरुख खान पर कमेंट करने के लिए मैं गलत इंसान हूं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं शाहरुख खान के साथ किसी फिल्म में काम करने के काबिल नहीं हूं, क्योंकि उनके फैंस उनसे यही उम्मीद करते हैं। मैं उस तरह का सिनेमा करने के काबिल नहीं हूं।” बता दें कि वर्मा ने एक बार शाहरुख के साथ उनकी साल 2002 में आई क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘कंपनी’ के लिए कास्ट करने के बारे में सोचा था, लेकिन एक्टर से मिलने के तुरंत बाद उन्होंने अपना मन बदल लिया। इसके बारे में वर्मा ने कहा, “असल में मेरा पहला आइडिया शाहरुख को कास्ट करने का था। मैं गया और उन्हें कहानी सुनाई।

शाहरुख भी इंटरेस्टेड थे, लेकिन मुझे किसी तरह लगा कि शाहरुख की एक खास नेचुरल बॉडी लैंग्वेज है, बहुत एनर्जेटिक। अब ‘कंपनी’ के कैरेक्टर का आइडिया यह है कि वह बहुत सटल आदमी है। वह पीछे झुका हुआ है, वह एक्साइटेड नहीं होता, और उसकी सोच बहुत कोल्ड-ब्लडेड है। मुझे लगा कि शाहरुख की नेचुरल एनर्जी इसके खिलाफ जाएगी। मुझे लगा कि उन्हें शांत रखना, उनके और फिल्म दोनों के साथ नाइंसाफी होगी।”

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