98वें अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर 2026) में भारत को इस बार भी बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में निराशा हाथ लगी है। भारतीय फिल्म ‘होमबाउंड’ इस श्रेणी में नॉमिनेशन हासिल करने से चूक गई। गौरतलब है कि भारत की आखिरी फिल्म, जिसे ऑस्कर नॉमिनेशन मिला था, आमिर खान की ‘लगान’ (2002) थी। इसके बाद से भारतीय सिनेमा को इस कैटेगरी में अब तक नॉमिनेशन का इंतज़ार है।
बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म में नामांकित फिल्में
इस साल बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में जिन फिल्मों को नॉमिनेशन मिला है, उनमें शामिल हैं—
द सीक्रेट एजेंट (ब्राज़ील)
इट वाज़ जस्ट एन एक्सीडेंट (फ्रांस)
सेंटिमेंटल वैल्यू (नॉर्वे)
सिरात (स्पेन)
द वॉइस ऑफ हिंद राजब (ट्यूनीशिया)
क्या है ‘होमबाउंड’ की कहानी
करण जौहर की धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी होमबाउंड को करण जौहर, अपूर्व मेहता और अदार पूनावाला ने प्रोड्यूस किया है। यह फिल्म न्यूयॉर्क टाइम्स में साल 2020 में प्रकाशित बशरत पीर के लेख पर आधारित है।
फिल्म की कहानी शोएब और चंदन नाम के दो दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो समाज के दबे-कुचले तबके से आते हैं और एक ऐसी व्यवस्था से जूझते हैं, जहां भेदभाव गहराई तक फैला हुआ है। कहानी उस दौर को भी दिखाती है जब कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान दोनों अपनी आजीविका खो देते हैं और हालात उन्हें घर लौटने के लिए मजबूर कर देते हैं। होमबाउंड सामाजिक असमानता, संघर्ष और इंसानी जज़्बे की एक संवेदनशील झलक पेश करती है।
होमबाउंड के नॉमिनेशन से चूकने के साथ ही एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि भारतीय फिल्मों को बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में पहचान कब मिलेगी। दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री की उम्मीदें अब आने वाले वर्षों पर टिकी हैं, कि शायद कोई भारतीय फिल्म इस लंबे इंतज़ार को खत्म कर पाए।
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पिछले कुछ सालों में जिन भारतीय फिल्मों ने ऑस्कर कैंपेन चलाया है, वे अक्सर इससे जुड़े भारी खर्च को लेकर खुलकर बात करती रही हैं। इस मुद्दे पर करण जौहर ने पहले पीपिंग मून से बातचीत में कहा था कि ऑस्कर कैंपेन को फंड करना किसी “बॉटमलेस पिट” यानी अंतहीन खर्च जैसा होता है और यह एक कठिन चढ़ाई की तरह है, क्योंकि अंत में नतीजा क्या होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।
करण जौहर ने कहा, “ऑस्कर कैंपेन के लिए आपको पब्लिसिस्ट रखने पड़ते हैं, विदेशों में ट्रैवल करना पड़ता है, वहां मीडिया में अपनी मौजूदगी दर्ज करानी होती है और स्क्रीनिंग्स आयोजित करनी पड़ती हैं। इसमें बहुत सारा खर्च और मेहनत लगती है।”
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उन्होंने आगे बताया कि इस दौरान अदार पूनावाला ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। “अदार ने कहा कि यह एक बेहतरीन मौका है और फिल्म भी खास है। चलिए, अपनी पूरी क्षमता से कोशिश करते हैं। इसमें मुनाफा या नुकसान मत देखिए। इसे पैशन के तौर पर देखिए, न कि पैसों के फायदे के लिए। यह हमारे लिए कमाई का जरिया नहीं है। यह विश्वसनीयता और साख की बात है। ज़िंदा रहने के लिए हम दूसरी फिल्में करेंगे, लेकिन होमबाउंड हमेशा से एक पैशन प्रोजेक्ट रही है। इस फिल्म में कोई आर्थिक खेल नहीं था।”
