आरती सक्सेना

हाल ही में प्रदर्शित रणबीर कपूर की फिल्म एनिमल के सामने विक्की कौशल अभिनीत सैम बहादुर अच्छी होने के बावजूद नही टिक पाई। फिल्म ने एनिमल के मुकाबले कम कमाई की। ऐसे में सभी के मन मे एक सवाल उठ रहा है कि क्या अब बड़े बजट की फिल्में ही बनेंगी और चलेंगी। क्या छोटे बजट की फिल्मों को ओटीटी का ही सहारा लेना पड़ेगा? एक निगाह…

कोविड के बाद फिल्मों के चुनाव को लेकर दर्शकों में बड़ा बदलाव देखने में आ रहा है। अब ज्यादातर दर्शक वही फिल्म देखने सिनेमाघर जाते हैं, जो बड़े स्तर पर बनी हो। प्राथमिकता में अच्छे सेट, अच्छी लोकेशन, अच्छी कहानी और पसंदीदा कलाकार शामिल होते हैं। शाहरुख खान की जवान और पठान फिल्म हो या अक्षय कुमार की सूर्यवंशी, रणबीर कपूर की एनिमल, या सलमान खान की टाइगर 3 ही वरीयता में हैं।

इन सभी फिल्मों के लिए सिनेमाघर में दर्शक उमड़े हैं। मंहगे टिकट के बावजूद दर्शक कम नहीं हुए। वहीं, छोटे बजट की फिल्मों जैसे सैम बहादुर, फर्रे अच्छी होने के बावजूद ज्यादा समय तक थिएटर में नहीं टिक पाईं। इनके निर्माताओं के मन मे एक ही सवाल उठ रहा है कि क्या छोटे बजट की फिल्मों का कोई भविष्य है?

हालांकि अभिनेता सलमान खान इस बात से सहमत नहीं है कि छोटे बजट की फिल्मों को सिनेमाघर या दर्शक नहीं मिल रहे। हाल ही में टाइगर 3 की सफलता के बाद दिए एक साक्षात्कार में सलमान खान ने कहा कि फिल्म वही चलती है जो अच्छी बनती है। अगर छोटे बजट की फिल्म का कारोबार बड़े बजट की फिल्म के मुकाबले कम होता है तो उसकी लागत भी कम होती है।

जैसे मेरी भांजी अलीजह अग्निहोत्री अभिनीत फिल्म फर्रे कम बजट की और नए कलाकारों के साथ बनी औसत फिल्म है। लेकिन इस फिल्म ने अच्छी कमाई की। यह अच्छी चल भी रही है। वहीं मेरी खुद की फिल्म किसी का भाई किसी की जान उतनी नहीं चली, जितनी की उम्मीद की थी। संपादक और फिल्म आलोचक नरेंद्र गुप्ता सलमान खान की बात से पूरी तरह सहमत नहीं है ।

गुप्ता के अनुसार सीधी सी बात है महंगे टिकट के कारण दर्शक वही फिल्म देखने थिएटर में जाएंगे जिसमें ज्यादा आनंद औ मनोरंजन मिले। जो फिल्म घर में बैठकर देखी जा सकती है उसके लिए भला दर्शक ज्यादा पैसा क्यों खर्च करेंगे? कोविड से पहले टिकट कम दाम के थे, इसलिए दर्शक भी फिल्मों के चुनाव को लेकर ज्यादा सतर्क नहीं थे।

लेकिन ऐसा भी नहीं है की दर्शक छोटे बजट की फिल्में थिएटर में देखते ही नहीं है। अगर यह सच होता तो 12वीं फेल, जरा हटके जरा बचके, ड्रीम गर्ल2, सत्य प्रेम की कथा, फर्रे सिनेमाघर में अच्छा व्यवसाय ना करतीं। कहने का मतलब यह है कि वही फिल्म थिएटर तक पहुंचती है जिसे दर्शकों द्वारा सराहा जाता है।

छोटे बजट की फिल्मों को लेकर प्रतिस्पर्धा थोड़ी ज्यादा है जैसे कि अगर छोटे बजट की 10 फिल्में प्रदर्शित होती हैं तो उनमें से दो फिल्मों को ही बाक्स आफिस पर अच्छा संग्रह मिलता है। इसके विपरीत बड़े बजट और बड़े सितारों वाली फिल्में बहुत ज्यादा प्रचार और विपणन के कारण दर्शकों को थिएटर तक खींचने में कामयाब हो जाती हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं है की बड़े बजट की फिल्मों को सिनेमाघरों में रिलीज आसानी से मिल जाती है। लेकिन कम बजट वाली फिल्मों को ओटीटी पर दिखाना पड़ता है।

भविष्य में बड़े बजट और छोटे बजट की फिल्में…

भविष्य में कई ऐसी फिल्में प्रदर्शित होने वाली हैं जिनका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। इनमें प्रभास की सालार, सलमान खान की सूरज बड़जात्या के बैनर की अनाम फिल्म, कैटरीना कैफ की मैरी क्रिसमस, शाहरुख खान की डंकी, अजय देवगन की मैदान, अक्षय कुमार टाइगर श्राफ की बड़े मियां छोटे मियां, करण जौहर की सलमान खान अभिनीत फिल्म द बुल , सिद्धार्थ मल्होत्रा की योद्धा, करण जौहर की फिल्म तख्त, दबंग4, किक 2, ऋतिक रोशन की फाइटर इत्यादि हैं।

इसके अलावा छोटे और कम बजट की फिल्में जैसे कंगना रनौत की इमरजेंसी, इमरान हाशमी की फादर्स डे, दही चीनी, पंकज त्रिपाठी की मैं अटल हूं, सारा अली खान और आदित्य राय कपूर की मेट्रो इन दोनों, राजकुमार राव की श्री, तापसी पन्नू की डियर एंड लवली, जाह्रवी कपूर और वरुण धवन की फिल्म भूमि ,संजय दत्त की 11, हिमेश रेशमिया की एक्सपोज रिटर्न इत्यादि।