संगीतकार एआर रहमान नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ के लिए पांच ग्रैमी पुरस्कार विजेता म्यूजिक कंपोजर हांस जिमर के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस बात की उन्हें खुशी है कि ‘रामायण’ जैसी फिल्म के लिए उन्हें काम करने का मौका मिला। मुस्लिम होने के बावजूद हिंदू ग्रंथ पर आधारित ‘रामायण’ के लिए म्यूजिक तैयार करने पर एआर रहमान ने बयान दिया है, उनका कहना है कि वो अच्छी चीजों को महत्व देते हैं।
बीबीसी एशियन के यूट्यूब चैनल पर एक इंटरव्यू के दौरान, रहमान से पूछा गया कि क्या इस पर काम करते समय उनकी धार्मिक मान्यताओं का कोई प्रभाव पड़ा। इस सवाल पर उन्होंने कहा, “मैंने एक ब्राह्मण स्कूल में पढ़ाई की है और हर साल हमारे यहां रामायण और महाभारत पढ़ाई जाती थी, इसलिए मुझे कहानी के बारे में पता है। कहानी एक व्यक्ति कितना गुणी हो सकता है, उच्च आदर्श क्या होते हैं और ऐसी ही कई बातों के बारे में है, लोग शायद न मानें, लेकिन मैं इन सभी अच्छी बातों को महत्व देता हूं। ऐसी कोई भी अच्छी बात जिससे कुछ सीखा जा सके, मुझे पसंद है। पैगंबर ने कहा है कि ज्ञान अनमोल है, चाहे वह कहीं से भी मिले-एक राजा से, एक भिखारी से, एक अच्छे कर्म से या एक बुरे कर्म से। आपको चीजों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए।”
दो धर्मों के लोग कर रहे ‘रामायण’ के लिए काम
रहमान रहमान ने आगे कहा, “मुझे लगता है कि हमें छोटी सोच और स्वार्थ से ऊपर उठना होगा। क्योंकि जब हम ऊपर उठते हैं और तेजस्वी बनते हैं, तो हम उसी तेजस्वी का रूप धारण कर लेते हैं, और यह बहुत महत्वपूर्ण है। मुझे इस पूरे प्रोजेक्ट पर गर्व है। हांस जिमर क्रिश्चियन हैं, मैं मुसलमान हूं, और रामायण हिंदू धर्म का ग्रंथ है।” द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया के साथ एक दूसरे इंटरव्यू में, रहमान ने जिमर के साथ एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम करने के बारे में कहा था कि ये दोनों के लिए ही बेहद चुनौतीपूर्ण है। उनका कहना था कि वो एक ऐसे प्रतिष्ठित और विश्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण रचना के लिए संगीत तैयार कर रहे हैं।
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जन्म से मुसलमान नहीं हैं एआर रहमान
एआर रहमान एक मुस्लिम हैं, लेकिन बता दें उनका जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था। वह जन्म से मुसलमान नहीं हैं, बल्कि वह 6 जनवरी 1967 को तमिलनाडु में हिंदू परिवार में पैदा हुए थे और उनका नाम ए.एस. दिलीप कुमार था। मगर बाद उन्होंने अपना धर्म बदल दिया, इसके पीछे कई व्यक्तिगत और आध्यात्मिक कारण बताए जाते हैं। जब रहमान बहुत छोटे थे तो उनके पिता रआर.के. शेखर जो एक प्रसिद्ध संगीतकार थे, उनका निधन हो गया था। इस घटना से पूरा परिवार गहरे मानसिक और आर्थिक संकट में आ गया। इसके साथ ही रहमान की बहन लंबे समय तक गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। उस समय परिवार ने कई आध्यात्मिक गुरुओं और धार्मिक रास्तों की तलाश की। इसी दौरान वे सूफी संतों और इस्लामी आध्यात्मिकता के संपर्क में आए और उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।
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जब रहमान 23 साल के थे तब उनकी मां करीमा बेगम समेत पूरे परिवार ने इस्लाम धर्म अपना लिया। तब उनका नाम ए.एस. दिलीप कुमार से बदलकर अल्ला रखा रहमान हो गया। रहमान के मुताबिक धर्म का मतलब है शांति, प्रेम और इंसानियत है और उनका संगीत उनकी इबादत है।
