टुनटुन फिल्म इंडस्ट्री का ऐसा नाम जिसे सुनते ही लोगों के चहरे पर हंसी आ जाती थी, उन्हें इंडस्ट्री की पहली महिला कॉमेडियन भी कहा जाता है। एक्ट्रेस टुनटुन ने एक दौर में कई दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया था। वह फिल्मों में अपनी कॉमेडी की वजह से पहचान बना चुकी थीं लेकिन असल में वह प्ले बैक सिंगर बनने मुंबई आई थीं। हालांकि उन्होंने कई गाने भी गाए हैं, जिनमें ‘दर्द’ (1947) में ‘अफसाना लिख रही हूं…’ गाना भी शामिल है। यह गाना खूब पसंद किया गया था। टुनटुन फिल्मों के जरिए जितना ज्यादा लोगों को हंसाती थी उनकी खुद की जिंदगी उससे भी ज्यादा दर्द भरी रही है। चलिए बताते हैं टुनटुन के जीवन से जुड़ी वह बातें जब 2 वक्त की रोटी के लिए उनसे नौकरों की तरह काम करवाया जाता था।

टुनटुन का वास्तविक नाम उमा देवी खत्री था। दिल्ली के करीब अलीपुर में रहने के दौरान जब उमा की उम्र महज 4 साल थी, जमीन विवाद में माता-पिता का कत्ल हो गया था। बाद में 9 साल के भाई का भी कत्ल हो गया था। अब 12 साल की उमा रिश्तेदारों के भरोसे रह रही थीं। उन्हें 2 वक्त का खना देने के नाम पर नौकर की तरह काम कराया जाता था। रिश्तेदारी में जहां भी शादी या कोई समारोह होता तो काम के लिए उमा को भेज दिया जाता था।

इन मुश्किलों दिनों में भी उमा को गाने का शौक था। हालांकि उन्हें कई बार गाना गाने की वजह से मारा-पीटा भी जाता था लेकिन इसके बाद भी उनका जुनून कम नहीं हुआ। एक दिन टुनटुन का सब्र टूट गया और वह प्लेबैक सिंगर बनने के लिए मुंबई भाग आईं। उस वक्त उमा की उम्र महज 14 वर्ष थी। सन् 1947 में उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला था और देखते ही देखते उमा ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बना ली, उन्हें टुनटुन के नाम से जाना जाने लगा।

पांच दशक के करियर में टुनटुन ने करीब 200 फिल्मों में काम किया है। 90 का दशक आते-आते उन्होंने फिल्मों से खुद को अलग कर लिया। 24 नवंबर, 2003 को टुनटुन ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन आज भी वह लोगों के दिलों में जिंदा हैं।