देश के दक्षिणी राज्य केरल में भाजपा राजनीतिक सेंध लगाने को बेकरार है। इसी के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए साल पर 6 जनवरी को केरल के पत्तनमथिट्टा से 2019 के लोकसभा चुनावों के प्रचार अभियान का शंखनाद करेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ नेता ने गुरुवार (27 दिसंबर) को तिरुवनंतपुरम में यह जानकारी दी। संवाददाताओं से बात करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पी.एस. श्रीधरन पिल्लई ने कहा कि पीएम मोदी 6 जनवरी को आंध्र प्रदेश से पत्तनमथिट्टा आएंगे। पत्तनमथिट्टा तिरुवनंतपुरम से करीब 120 किलोमीटर दूर है।
पिल्लई ने साफ तौर पर कहा, “पीएम यहां चुनाव प्रचार के लिए आ रहे हैं।” केरल की 140 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के पास एक मात्र सीट है लेकिन आगामी लोकसभा चुनावों के मद्दनेजर भाजपा वहां उम्मीद लगाए हुए है। 2014 के लोकसभा चुनावों में तिरुवनंतपुरम सीट पर भाजपा दूसरे स्थान पर रही थी। केरल में लोकसभा की कुल 20 सीटें हैं। भाजपा और संघ पिछले कई महीनों से केरल में अपनी जड़ें मजबूत कर रहा है। कई मौकों पर सीपीएम कैडर और संघ के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प तक हो चुकी है।
दरअसल, पीएम मोदी का पत्तनमथिट्टा आना एक कूटनीतिक दांव माना जा रहा है, क्योंकि इसी जिले में सबरीमाला मंदिर स्थित है। इस मंदिर में 10 से 50 वर्ष तक की महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को हटाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को आदेश जारी कर सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी। कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ भाजपा ने वहां न केवल पुरातनपंथियों को गोलबंद किया है बल्कि अपनी राजनीतिक पैठ भी बढ़ाई है। इसके लिए भाजपा और अन्य हिन्दूवादी संगठनों ने लगातार कई दिनों तक सीपीएम सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था। केरल भाजपा के अध्यक्ष पी.एस. श्रीधरन पिल्लई ने भी रथयात्रा निकाली थी और बयान दिया था कि राज्य में भाजपा को आगे बढ़ाने का यही बेहतर मौका है। उन पर भड़काऊ बयानबाजी करने का मुकदमा भी दर्ज है।
पीएम ने क्यों चुना केरल?
केरल में लेफ्ट पार्टियों का आधार हिंदू मतदाता ही हैं। ईसाई और मुस्लिम वोटरों पर कांग्रेस का प्रभाव रहा है। इसलिए भाजपा वहां लेफ्ट से हिन्दू वोटरों को छीनने की राजनीतिक लड़ाई लड़ रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में केरल में 6.4 फीसदी से बढ़कर 10.33 फीसदी तक वोट भाजपा को मिले थे। इसके बाद 2016 के विधान सभा चुनाव में वहां भाजपा का खाता खुला था। कुछ सीटों पर दूसरे नंबर पर भी रही थी। इससे पार्टी उत्साहित है। सबरीमाला विवाद ने भाजपा को नई ऊर्जा दे दी है। लिहाजा, भाजपा चाहती है कि पीएम की चुनावी सभा कर दक्षिण में एक तीर से दो निशाने साधे जाएं, पहला कि पीएम ने दक्षिण को अहमियत दी, इसका संदेश आम कार्यकर्ताओं और जनमानस के बीच जाए और दूसरा सबरीमाला विवाद को परोक्ष रूप से पीएम का भी समर्थन है। इससे भाजपा के वोट बैंक में बढ़ोत्तरी होगी।
