World Hindi Day 2026: भारत में बातचीत के लिए वैसे तो कई भाषाओं का इस्तेमाल किया जाता है। भारत की पारंपरिक और सांस्कृतिक विविधताओं का देश है। यहां हर राज्य का अपना पहनावा, अपना खान पान और अपना अलग कल्चर है। इतना ही नहीं यहां हर राज्य की भाषा भी अलग है, लेकिन बावजूद इसके पूरे देश को एक सूत्र में पिरोए रखने का काम देश की राष्ट्रीय भाषा हिंदी करती है। सिर्फ दक्षिण भारत के 1-2 राज्यों को छोड़कर आप हिंदी में कहीं भी बातचीत कर सकते हो। हिंदी की पहचान सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में है और इसीलिए हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है।

दुनिया भर में बोली जाती है हिंदी भाषा

हिंदी का चलन भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, फिलीपींस समेत कई देशों में देखने को मिलता है। हिंदी का इस्तेमाल अब दुनिया भर के देशों में किया जाता है और इसकी वजह ये है कि हिंदी भाषी लोग दुनिया भर में मौजूद हैं। हिंदी दुनिया में बोली जाने वाली पांच प्रमुख भाषाओं में से एक है। इस भाषा की इसी लोकप्रियता को देखते हुए और हिंदी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हर साल 10 जनवरी के दिन को विश्व हिंदी दिवस (Vishwa Hindi Diwas) के रूप में मनाया जाता है।

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World Hindi Diwas का इतिहास

विश्व हिंदी दिवस हर साल 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य पूरी दुनिया में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और सम्मान को बढ़ावा देना है।

इसकी शुरुआत कैसे हुई?

10 जनवरी 1975 को नागपुर (महाराष्ट्र) में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में भारत सरकार ने बाद में 10 जनवरी को “विश्व हिंदी दिवस” के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

साल 2006 में भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस घोषित किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इसकी घोषणा की थी और उसी वर्ष से यह दिवस पूरी दुनिया में भारतीय दूतावासों और सांस्कृतिक संस्थानों में मनाया जाने लगा।

क्या है इस साल की थीम?

हर साल इस दिन को मनाने के लिए एक थीम निर्धारित की जाती है। फिर दुनिया भर में हिंदी दिवस को उसी थीम के आधार पर सेलिब्रेट किया जाता है। साल 2026 में विश्व हिंदी दिवस की थीम ‘हिंदीः पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्मिमत्ता तक’ पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य है कि हिंदी पारंपरिक रूप से एक भाषा होने के साथ तकनीक की दुनिया में भी आगे है। इस भाषा को कृत्रिम बुद्धमित्ता के क्षेत्र में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

पढ़ें हिंदी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें

विदेश में 25 से अधिक पत्रिकाएं नियमित रूप से हिंदी भाषा में प्रकाशित की जाती हैं, साथ ही कई हिंदी कार्यक्रम भी प्रसारित किए जाते हैं। इतना ही नहीं, यूएई में तो एफएम रेडियो के कम से कम 3 ऐसे चैनल हैं, जहां आप 24 घंटे हिंदी फिल्मों के गाने सुन सकते हैं।

दुनियाभर में हिंदी की पढ़ाई को अब अंग्रेजी जितना अहम माना जाता है। इसी कड़ी में करीब 40 देशों के 600 से ज्यादा नामी-गिरामी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और संस्थाओं में हिंदी पढ़ाई जाती है। इनमें भी अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी में साल 1815 से और जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी में करीब 100 साल से ज्यादा समय से हिंदी का अध्ययन हो रहा है।

दुनियाभर में करीब 75 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं, जिनमें 53 करोड़ (2001 की जनगणना के मुताबिक) भारत में मौजूद हैं।

भारत के बाद सबसे ज्यादा नेपाल में बोलचाल के लिए हिंदी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, तीसरे नंबर पर अमेरिका का नाम है।

साल 2011 के अंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में एक लाख से ज्यादा लोग हिंदी भाषा बोलते हैं।