असम विधानसभा ने शनिवार को छह महत्वपूर्ण शिक्षा संबंधी बिलों को मंजूरी दे दी। हालांकि, इस दौरान विपक्षी दलों—कांग्रेस, CPI(M) और स्वतंत्र विधायक अखिल गोगोई ने वॉकआउट कर दिया। मतदान के दौरान कथित रूप से दरवाजे बंद करने को लेकर विपक्ष ने गंभीर आपत्ति जताई।
चार प्रमुख संशोधन बिल बिना विपक्ष के पारित
विपक्ष के बाहर रहने के कारण सदन ने चार अहम बिलों को पास कर दिया, जिनकी डिटेल इस प्रकार है।
पहला बिल- असम गैर-सरकारी शैक्षणिक संस्थान (शुल्क विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2025
दूसरा बिल- असम शिक्षा (शिक्षकों का प्रांतीयकरण एवं शैक्षणिक संस्थानों का पुनर्गठन) (संशोधन) विधेयक, 2025
तीसरा बिल- असम प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय शिक्षक (पोस्टिंग और ट्रांसफर विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2025
चौथा बिल- असम शिक्षा (वेंचर शैक्षणिक संस्थानों के गैर-शिक्षण कर्मचारियों के सेवाओं का प्रांतीयकरण) (संशोधन) विधेयक, 2025
इसके अलावा विधानसभा में आजिम प्रेमजी विश्वविद्यालय और NERIM विश्वविद्यालय बिल भी पास किया गया है, जिन्हें शिक्षा मंत्री रणोज पेगू द्वारा पेश किया गया था।
आजिम प्रेमजी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025, नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (NERIM) विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 को भी वॉयस वोट से पारित किया गया। यह शीतकालीन सत्र का अंतिम दिन था।
विपक्ष के संशोधन खारिज, चार घंटे बहस के बाद बढ़ा विवाद
चार संशोधन बिलों पर चार घंटे से अधिक की लंबी बहस हुई, जिसमें कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकीया, CPI(M) विधायक मनोरंजन तालुकदार और स्वतंत्र विधायक अखिल गोगोई ने शिकायत की कि सरकार ने उनके किसी भी संशोधन प्रस्ताव पर विचार नहीं किया।
विपक्ष ने मांग की कि उनके संशोधनों पर वोटिंग कराई जाए, लेकिन स्पीकर बिस्वजीत दैमरी ने विधेयकों को पारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी।
‘डोर बंद’ आदेश पर विवाद, 10 विधायकों की एंट्री का आरोप
जब विपक्ष ने संशोधनों को वापस लेने से इनकार किया, तो स्पीकर ने आदेश दिया कि मतदान के दौरान सभी दरवाजे तुरंत बंद कर दिए जाएं ताकि कोई विधायक अंदर-बाहर न हो सके लेकिन विपक्ष का आरोप है कि आदेश के बाद भी लगभग 10 सत्तारूढ़ दल के विधायक सदन में प्रवेश कर गए। सत्तापक्ष ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज कर दिया। स्पीकर ने कहा कि उन्हें किसी देर से प्रवेश की जानकारी नहीं है। इस पर नाराज़ विपक्षी सदस्य वेल में आए और सदन से वॉकआउट कर दिया।
AIUDF के विधायक पहले ही निलंबित
इसके पहले AIUDF के विधायकों को शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के भविष्य को लेकर प्लेकार्ड दिखाने पर सदन से निलंबित कर दिया गया था।
विपक्ष ने उठाए ये प्रमुख मुद्दे
विपक्ष के संशोधनों में जो मुद्दे शामिल थे उसमें शैक्षणिक संस्थानों के प्रांतीयकरण के लिए कट-ऑफ वर्ष में ढील, न्यूनतम नामांकन मानदंड घटाने की मांग, मदरसों को भी अधिनियम के दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव और सरकार ने कानूनी जटिलता बताकर खारिज किए संशोधन शामिल थे। शिक्षा मंत्री रणोज पेगू ने विपक्ष के सभी सुझावों को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि इन बदलावों से कानूनी जटिलताएं पैदा होंगी, इसलिए इन्हें स्वीकार करना संभव नहीं है।
