आरती सक्सेना
सवाल :आगामी फिल्म का नाम गोल्ड रखने के पीछे खास वजह क्या है?
’ दरअसल गोल्ड फिल्म सच्ची कहानी पर आधारित है। इस फिल्म की कहानी शुरू होती है 1936 से जब हम हॉकी तो खेलते थे लेकिन ब्रिटिश इंडिया के लिए। उसी दौरान हम हॉकी खेल रहे थे जर्मर्नी के साथ। तब हिटलर भी मैच देखने आया था और ब्रिटिश इंडिया जीत रहा था। हिटलर मैच छोड़ कर चला गया था। उसी दौरान हिटलर ने हमारे एक दो हॉकी खिलाड़ियों को जर्मर्नी की तरफ से खेलने की पेशकश की थी। इसके कुछ साल बाद भारत आजाद हो गया। और 1948 में एक बार फिर ओलंपिक मे हॉकी का मैच हुआ और इस बार भारत और ब्रिटेन के बीच मैच था और भारत ने स्वर्ण जीता। चूंकि पहली बार गोल्ड मैडल मिला था, इसलिए फिल्म का नाम गोल्ड है।
सवाल : गोल्ड में आप किस तरह का किरदार निभा रहे हैं?
’इस फिल्म में मैं खिलाड़ी नहीं हूं न ही प्रशिक्षक हूं बल्कि मैं एक मैनेजर की भूमिका में हूं। मेरे किरदार का नाम तपन है। वह बंगाली है, साथ ही जुनूनी भी है। ऐसा ही कुछ मैंने भी इस फिल्म में किरदार निभाया है। कहानी या अपने रोल के बारे में ज्यादा नहीं बता सकूंगा क्योंकि फिर आपको फिल्म देखने में मजा नहीं आएगा ।
सवाल :आपको देश से बेहद प्यार है और आपने इस खातिर कई सुधार वाली प्रेरणादायक फिल्में भी की हैं। जैसे पैडमेन, टॉयलेट एक प्रेम कथा। ऐसे में क्या आपको लगता है कि देश में आपकी फिल्मों के बाद कोई सुधार आया?
’ऐसी फिल्में बनाते वक्त हमारा मकसद होता है देश को जागृत करना। मैं यह नहीं देखता कि देश कितना सुधरा बल्कि यह देखता हूं कि फिल्म देखने के बाद कितने लोगों ने क्या सीखा। हम लोगों तक संदेश ही पहुंचा सकते हैं, जैसे कि पहले 54 फीसद लोगों के पास शौचालय नहीं था। अब 32 फीसद लोगों यहां शौचालय नहीं है। यानी इतना सुधार तो आया ही है।
सवाल : हॉकी हमारा राष्ट्रीय खेल है लेकिन हॉकी खिलाड़ी ध्यानचंद को बहुत कम लोग जानते हैं लेकिन क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर को सभी जानते हैं। तो क्या यह माना जाए कि आपने हॉकी को बढ़ाने के मकसद से यह फिल्म की है?
’मैंने इस फिल्म में काम इसलिए किया है क्योंकि इसमें बताया गया है कि कैसे हॉकी के जरिये पहली बार भारत को स्वर्ण पदक मिला। जहां तक खेल का सवाल है तो हॉकी हो या क्रिकेट हर खेल अच्छा है। जब हम अपनी जिंदगी में किसी भी एक खेल को शामिल करते हैं तो हमारा दिमाग स्वस्थ और परिपक्व होता है। आज लोग मोबाइल और इंटरनेट पर बैठे रहते हैं और खेल से दूर होते जा रहे हैं। इसलिए बीमारियां बढ़ रही हैं। मेरा मानना है कि जिंदगी में किसी एक खेल को जरूर शामिल करना चाहिए क्योंकि इससे आपका सिर्फ मानसिक ही नहीं शारीरिक विकास भी होता है।
सवाल : गोल्ड मे आपके साथ पहली बार टीवी कलाकार मोनी रॉय पदार्पण कर रही हैं। उनके बारे में क्या कहेंगे?
’मोनी बहुत ही प्रतिभाशाली हैं। उनको तो टीवी का बहुत अच्छा अनुभव है। इस फिल्म में भी उनका बहुत अच्छा रोल है और एकदम हटकर है। यह उनकी भले ही पहली फिल्म है लेकिन अभिनय के तौर पर वे बहत परिपक्व हैं।
सवाल : सोशल मीडिया में आपको भारत कुमार के नाम से नवाजा जाता है?
’नहीं मुझे यह सब पसंद नहीं है। मैं कोई ब्रांड नहीं बनना चाहता। मैं अक्षय कुमार हूं जो एक्शन, स्टंट, कॉमेडी के लिए जाना जाता है। और मैं उसी में खुश हूं।
सवाल :क्या आपके बच्चे भी आपकी तरह खेल में दिलचस्पी रखते हैं?
’अभी वे बहुत छोेटे हैं। वैसे मेरे आरव ने मार्शल आर्ट में ब्लैक ब्लैट हासिल कर लिया है और बेटी सात साल की है। उसे दौड़ना खूब भाता है। मैं अपने बच्चों पर अपनी मर्जी बिल्कुल नहीं थोपता। उनको वही करने देता हूं जो वे करना चाहते हैं। हां, उन्हें सही राह जरूर दिखाता हूं। उस पर वे चलना चाहते हैं कि नहीं यह उन पर निर्भर करता है।
सवाल :आप गंभीर सिनेमा की तरफ ज्यादा आकर्षित हैं। ऐसे में क्या आपको लगता है कि दर्शक आपकी कॉमेडी, एक्शन और रोमांटिक फिल्मों को मिस कर रहे हैं?
’मैं खुद भी हर तरह की फिल्में करना चाहता हूं। जैसे कॉमेडी के लिए तो मैं हाउसफुल 4 कर रहा हूं। केसरी में एक्शन देखने को मिलेगा। बाकी ऐसा है कि मेरे पास अगर अच्छी स्क्रिप्ट आएगी तो ही मैं करूंगा। जैसे कि मैं खुद ओह माई गाड पार्ट 2 करना चाहता हूं लेकिन अभी तक अच्छी स्क्रिप्ट आई ही नहीं।

