स्पर्धा
अभी पिछले हफ्ते ही सौम्या ने अपने परिवार के बिना दो दिन के ट्रिप पर जाने का फैसला किया। हालांकि यह सिर्फ दो दिन के लिए ही था लेकिन इस फैसले को लेने के लिए उन्हें पूरे एक महीने का मंथन करना पड़ा। कारण था, अपने छोटे बच्चों को छोड़कर बाहर निकलना। सौम्या को खासकर इसके लिए अलग तरह की जद्दोजहद करनी पड़ी क्योंकि उसके जुड़वा बच्चे हैं। लेकिन सौम्या ने एक बार सोच लिया तो पीछे पलटकर नहीं देखा।
मुंबई की रहने वाली सौम्या के लिए यह निर्णय लेना कठिन जरूर रहा लेकिन असंभव नहीं। पहले जहां यह ट्रेंड विदेशों में ही देखने को मिलता था लेकिन अब अपने देश के न सिर्फ महानगरों बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी यह बदलाव देखने को मिल रहा है। तभी तो बोकारो की रहने वाली श्रेया ठाकुर ने उत्तरांचल के सैर की घोषणा की तो घर वालों ने कड़ा विरोध किया। इस तरह अंतत: श्रेया को इजाजत मिल ही गई। आज हमारे इर्द-गिर्द लड़कियों की आजादी को लेकर अनगिनत कहानियां और बहस चल रही है।
इस सच से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि आज लड़कियां अपने मन को लेकर पहले से कहीं ज्यादा समझदार हो गई हैं। समझदारी की इसी परिभाषा में बिल्कुल फिट बैठता है उनका अकेले घूमना। इस बाबत किए गए कई सर्वेक्षणों के दौरान अधिकतर महिलाओं ने इसे अपनी आजादी और खुशी से जोड़ा। अकेले घूमना उन्हें आजादी का अहसास देता है, ऐसा 47 फीसद का मानना है। 39 फीसद अकेले घूमने को बतौर चुनौती लेती हैं। केवल 28 फीसद महिलाएं मानती हैं कि चूंकि उनके अपनों के पास उनके साथ घूमने के लिए समय या रिसोर्स नहीं होते हैं, तो वे अकेले घूम लेती हैं।
लड़कियों के अकेले घूमने को काफी हद तक सुरक्षित करने का काम बेहतर होती कनेक्टिविटी ने भी किया है। इस एक वजह ने इन्हें अब तक अकेले घूमने के लिए रोक रखा था। पहले परिवार को मनाना मुश्किल काम होता था लेकिन अब यदि आप उनके साथ लगातार संपर्क में रहते हैं तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती। कहीं किसी को दिक्कत हो भी तो वो इंटरनेट का सहारा लेकर परेशानी का हल पा सकती है।घर- परिवार के साथ तो सभी घूमते हैं लेकिन अकेले घूमना थोड़ा अलग जरूर है।
इस तरह घूमने के शौक ने लड़कियों को अकेले घर से बाहर, वह भी लंबे ट्रिप पर भेजना शुरू कर दिया है। यह शौक न केवल मनमर्जी की आजादी देता है बल्कि हमारे समाज की लाइफस्टाइल का नया हिस्सा भी बनता जा रहा है। विदेशों में तो सालों से लड़कियों का अकेला घूमना बदस्तूर जारी है लेकिन अपने देश में अब जाकर इस बारे में थोड़ी जागरूकता आई है और लड़कियों ने अपने बैग को पैक करके निकलना शुरू किया है।
दरअसल, अकेले घूमने से कोई दिक्कत पैदा नहीं होती, दिक्कत तो होती है समझदारी के न होने से। अकेले घूमने की शौकीन रुबी देसाई बताती हैं- हम भले ही अकेले घूमने को सोलो ट्रिप कह देते हैं लेकिन असल में यह सोलो होती नहीं है। इस दौरान हम कई नए लोगों से मिलते हैं, कुछ मजेदार लोगों का साथ बाद में भी बना रहता है। अकेले घूमने का सबसे बड़ा आनंद यह है कि यहां आप अपनी मर्जी के मालिक होते हैं। जिस सड़क को चुनना है, चुन लो, जो खाना है, खा लो। कहने का मलतब कि आप आजाद होते हैं।
रुबी आगे कहती है- सोलो ट्रिप मुझे अपने कंफर्ट जोन से बाहर निलकने का मौका देता है। मुझे जब भी मौका मिलता है, मैं छोटे-बड़े ट्रिप पर घूमने निकल जाती हूं। अकेले घूमने का एक नुकसान सुरक्षा को लेकर है, मुझे हमेशा अतिरिक्त तौर पर अपने कान खोलकर रखने पड़ते हैं। अकेले घूमने वाली महिलाओं में न केवल कुंवारी लड़कियां हैं बल्कि विवाहित, तलाकशुदा, गृहिणी, प्रोफेशनल और स्वरोजगार वाली भी हैं। इन सबमें एक बात जो आम है, वह यह कि ये सब न केवल आर्थिक तौर पर अपने पैरों पर खड़ी हैं बल्कि मानसिक तौर पर भी अन्य महिलाओं से मजबूत हैं। यही वजह है कि इस संबंध में किए गए सर्वेक्षण का आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
गूगल के अनुसार, 2017 में सोलो वूमेन ट्रैवलर के सर्च का आंकड़ा 32 फीसद और 2018 में 59 फीसद था तो 2019 में इस सर्च में आश्चर्यजनक तौर पर इजाफा देखने को मिली। यह आंकड़ा चौंकाने वाले तथ्य के साथ 230 फीसद बढ़ गया। पिनटेरेस्ट जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट ने इसमें 250 फीसद वृद्धि दर्ज की है। इस समय अपने देश में कई ट्रैवल क्लब हैं, जहां समय-समय पर अकेली महिलाओं के घूमने के लिए ट्रिप की योजना बनाई जाती है। इनके जरिए भी आप घूमने जा सकती हैं। इसके कई फायदे हैं, जैसे- अकेले घूमने की परेशानियों से बचना, नए दोस्त बनाने का मौका और अकेले घूमने का लुत्फ भी उठाने का मौका।
ऐसे ही एक वूमेन ट्रैवलिंग क्लब की सदस्य नित्या जोशी कहती हैं, ‘मुझे कई बार इच्छा होती थी कि मैं सब कुछ छोड़कर अकेले घूमने जाऊं लेकिन संभव नहीं हो पाता था। अब जब से मुझे इस ट्रैवल क्लब के बारे में पता चला, मैंने इसकी स्दस्यता ले ली। अब मैं बेफिक्र होकर कहीं भी घूमने जा पाती हूं। इसके जरिये, एक तरह से मैंने खुद को ढूंढ़ा है। मेरे अंदर आत्मविश्वास जागा है और मैं पहले से कहीं अधिक सशक्त हो गई हूं।’
यही वजह है कि अब भारतीय महिलाएं यह मानने को तैयार ही नहीं हैं कि वे सांस्कृतिक कारणों या सुरक्षा संबधी कारणों की वजह से अकेले नहीं घूम सकती हैं।अकेले घूमने वाली महिलाओं की दुनिया आज इकहरी नहीं हैं। महिलाएं आज ऐसी कई गतिविधियों के लिए बाहर निकल रही हैं, जिन पर अब तक पुरुषों का हक था।

