हिंदी के सुपरिचित कथाकार रवींद्र कालिया का शनिवार की दोपहर यहां गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। 77 साल के कालिया को लीवर सिरोसिस की परेशानी के कारण पिछले दिनों अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वे गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती थे। उनके परिवार में पत्नी ममता कालिया और दो बेटे हैं।

ममता कालिया हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका हैं।
कालिया के करीबी सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनके स्वास्थ्य में थोड़ा सुधार होने लगा था। लेकिन शनिवार की दोपहर तकरीबन तीन बजे उनका निधन हो गया। वे कैंसर से भी पीड़ित थे। कालिया का अंतिम संस्कार रविवार को यहां लोधी रोड शवदाह गृह में किया जाएगा।

11 नवंबर 1938 को पंजाब के जलंधर में जन्मे कालिया को साठोत्तरी हिंदी कहानी के सशक्त हस्ताक्षरों में माना जाता है। वे साठ के दशक में इलाहाबाद में बस गए थे। बाद में मुंबई से निकलने वाले साप्ताहिक ‘धर्मयुग’ में भी रहे। उनकी प्रकाशित कृतियों में खुदा सही सलामत है, एबीसीडी, 17 रानडे रोड (उपन्यास), नौ साल छोटी पत्नी, काला रजिस्टर, गरीबी हटाओ, बांके लाल, सत्ताइस साल की उमर तक, जरा सी रोशनी, गली कूचे, चकैया नीम (कहानी संग्रह), राग मिलावट मालकौंस और नींद क्यों रात भर आती नहीं (व्यंग्य), कामरेड मोनालिजा, सृजन के सहयात्री, गालिब छुटी शराब (संस्मरण) आदि शामिल हैं।

उन्होंने कोलकाता से निकलने वाली ‘वागर्थ’ और नई दिल्ली से प्रकाशित ‘नया ज्ञानोदय’ सहित कुछ पत्रिकाओं के अलावा कई पुस्तकों का संपादन किया। वे भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक भी रहे। उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के साहित्य भूषण और लोहिया सम्मान के अलावा कई पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया। रवींद्र कालिया के निधन पर शोक जताते हुए साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि कालिया विशिष्ट सृजनात्मक लेखक थे। उन्होंने अपने समय की विसंगतियों और विडंबनाओं को बेबाक अंदाज में व्यक्त किया। जनवादी लेखक संघ ने कालिया के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे हिंदी साहित्य की अपूरणीय क्षति बताया।