गुजरात विधानसभा चुनाव में पहली बार सौ से भी कम सीटें हासिल करने और कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन से भाजपा में हड़कंप मच गया है। कार्यकर्ता तो गुजरात और हिमाचल प्रदेश में पार्टी की सरकार बनने से उत्‍साहित हैं, लेकिन अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंदर से सहमे बताए जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि गुजरात के ऐसे नतीजे को मोदी-शाह की जोड़ी 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए अच्‍छे संकेत नहीं मान रही। सूत्रों का कहना है कि आरएसएस की ओर से भी प्रधानमंत्री और भाजपा अध्‍यक्ष को यही संकेत मिला है। संघ प्रमुख ने गुजरात के नतीजों को खतरे की घंटी के रूप में देखने की सलाह दी है।

चुनाव नतीजों के विश्‍लेषण और संघ की प्रतिक्रिया के मद्देनजर मंगलवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सरकारी आवास पर आपात बैठक बुलाई। रात को जब अमित शाह प्रधानमंत्री को दिन की गतिविधियों की जानकारी देने गए, तभी उन्‍होंने इस बैठक का प्रस्‍ताव रखा। आनन-फानन में वित्त मंत्री अरुण जेटली, गृह मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई मंत्रियों को फोनकर तत्‍काल प्रधानमंत्री निवास पहुंचने के लिए कहा गया। वहां मौजूद एक सूत्र की मानें तो उस समय गुजरात का एक महत्‍वपूर्ण नेता भी अमित शाह के साथ प्रधानमंत्री के घर गए थे। उन्‍होंने सलाह दी कि बैठक में लालकृष्‍ण आडवाणी को भी बुलाया जाए। लेकिन मोदी ने इस पर कोई ध्‍यान नहीं दिया।

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रात करीब 11 बजे जब बैठक शुरू हुई तो एक राय यह सामने आई की जीएसटी से गुजरात की जनता नाखुश है। तर्क दिया गया कि शहरों में कारोबारी भले खुश हैं, पर इसका कारण यह है कि वे जीएसटी से लाभान्‍वित हो रहे हैं। लेकिन, वे इसका फायदा ग्राहकों को नहीं होने दे रहे। इस वजह से गांवों में लोग बहुत नाराज हैं। भाजपा की हर चुनावी रणनीति बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने वाले एक मंत्री ने इसे कर्नाटक, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, छत्‍तीसगढ़ आदि राज्‍यों में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर घातक माना। बता दें कि अगले साल आठ राज्‍यों में चुनाव होने हैं। यह ख्‍याल आते ही प्रधानमंत्री सहम गए और उन्‍होंने वित्त मंत्री से कह दिया कि जीएसटी की जगह कोई ऐसी कर व्‍यवस्‍था लाने की संभावनाओं पर विचार करें जो चुनाव जिताने के लिहाज से कारगर हो। जेटली को एक सप्‍ताह में वैकल्‍पिक व्‍यवस्‍था का मसौदा सौंपने को कहा गया है।

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सूत्र बताते हैं कि अपेक्षाकृत खराब चुनावी प्रदर्शन का ठीकरा उनके मंत्रालय से जुड़ी नीतियों को बताए जाने के चलते जेटली नाराज भी हो गए। पर उन्‍होंने बड़ी मुिश्‍कल से नाराजगी छिपाई। प्रधानमंत्री यह भांप भी गए, पर उन्‍होंने कोई नरमी नहीं दिखाई। ऐसे में उम्‍मीद जगी है कि जल्‍द ही कोई ऐसी कर व्‍यवस्‍था बनेगी जो जनता की जेब पर हल्‍की पड़े।

(यह खबर आपको हंसने-हंसाने के लिए कोरी कल्‍पना के आधार पर लिखी गई है। इसे सीरियसली नहीं लें।)