रवि डे
घर को सुंदर बनाने के मकसद से बालकनियों और घर के भीतर गमलों में सजावटी पौधे तो सभी लगाते हैं, पर उनमें अगर कुछ सब्जी-भाजी के पौधे भी उगा लिए जाएं, तो न सिर्फ घर सुंदर और अलग दिखता है, बल्कि अपनी उगाई सब्जियां खाने का आनंद ही अलग होता है। गरमी के मौसम में लौकी, तोरई, खीरा, करेला, लोबिया जैसी सब्जियां ऐसी होती हैं, जिन्हें गमलों में आसानी से उगाया जा सकता है। इनकी बेलें बालकनी में फैल कर फूल और फल से घर को सुंदर तो बनाती ही हैं, गरमी में उनसे ठंडक का अहसास भी बना रहता है। अगर आपके घर के बाहर कुछ खुली जमीन है, तो फिर किचन गार्डन बनाने के लिए चिंता करने की जरूरत नहीं। अगर आपका घर ऊपर की किसी मंजिल पर है, तो भी चिंता की बात नहीं। ऊपर की मंजिल वाले घरों में किचन गार्डन बनाने के लिए बस थोड़ी-सी तैयारी की जरूरत होती है।
गमले और खाद-मिट्टी
जिनके घर भूतल पर नहीं हैं, उन्हें सब्जियां वगैरह उगाने को लेकर इसलिए झिझक होती है कि उन्हें लगता है कि गमले में उन्हें उगाना संभव नहीं होगा। मगर इस समस्या का हल बड़े गमलों से निकाला जा सकता है। अगर आपके घर की बालकनी छोटी है, तो उसके बाहरी हिस्से में लोहे की मजबूत चौड़ी रेलिंग लगवाएं, जिसमें चौड़े और बड़े गमलों को रखा जा सके। अब सब्जियां उगाने के मकसद से प्लास्टिक के चौकोर गमले बाजार में खूब मिलने लगे हैं। एक तो ये हल्के होते हैं और इन्हें यह ध्यान रख कर तैयार किया जाता है कि सब्जियों के पौधों की जड़ें ठीक से गहराई और चौड़ाई में फैल सकें। सब्जियां उगाने के लिए ऐसे ही गमलों का उपयोग करना चाहिए। गमलों में आधा हिस्सा गोबर की खाद या फिर कंपोस्ट और आधा हिस्सा मिट्टी और रेत मिलाकर भरें। मिट्टी भरते समय ध्यान रखें कि गमलों के पेंदे में छेद खुले हों, ताकि अतिरिक्त पानी होने पर आसानी से निकल जाए। अगर आपके पास खुली छत है, तो उस पर गमले रखने के लिए लोहे के सीढ़ीदार स्टैंड बनवाए जा सकते हैं, ताकि कम जगह में अधिक गमले लगाए जा सकें। इस तरह खुली छत पर बेल वाले पौधों को अधिक जगह भी मिल जाती है।
बालकनी में जाली लगवाएं
आजकल कबूतरों और दूसरे पंक्षियों को रोकने के मकसद से प्लास्टिक की जालियां लगाई जाने लगी हैं। ये जालियां मजबूत होती हैं और दिन हो या रात ऐसी जालियों से न तो बाहर का दृश्य प्रभावित होता है और न हवा रुकती है। इससे बालकनी में पंक्षियों, बंदरों वगैरह को आने से रोकने में मदद मिलती है। मगर आप बालकनी में सब्जियां बोना चाहते हैं, तो यह जाली आपके बड़े काम की साबित होती है। इसके सहारे बेल वाली सब्जियों के पौधे चढ़ कर फैल जाते हैं और खूब फल देते हैं। इस तरह बालकनी में उन्हें फैलने के लिए अलग से जगह की जरूरत नहीं पड़ती और जब वे जाली पर फैल जाती हैं तो घर में हरियाली का अहसास देती रहती हैं। लौकी, खीरा, लोबिया, करेले आदि की बेलें इस पर चढ़ाएं और ताजा सब्जियों के साथ हरियाली का भी आनंद लें।
बीज की रोपाई
सब्जियों की पौध उगाने के लिए मौसम का ध्यान रखना चाहिए। हर सब्जी हर मौसम में नहीं उगाई जा सकती। मैदानी और गरम इलाकों में यह मौसम भिंडी, करेला, तोरई, लौकी, खीरा वगैरह उगाने का है। गमलों में सब्जी उगानी है तो करेला, लौकी, तोरई और खीरा के बीज बो सकते हैं। भिंडी के लिए अधिक जगह की जरूरत होती है, क्योंकि अगर दो चार गमलों में भिंडी बोएंगे भी तो बहुत कम फल आ पाएंगे। इसलिए भिंडी के बजाय दूसरी सब्जियां रोपें। सब्जियों के बीज उन्हीं दुकानों पर मिल जाते हैं जहां फूलों के बीज उपलब्ध होते हैं। एक गमले में बेल वाले दो से अधिक पौधे न रोपें। इससे पौधों की जड़ों को फैलने की प्रयाप्त जगह मिल जाती है। पौधे सघन होंगे तो उनकी जड़ों के लिए जगह ठीक से नहीं बन पाएगी और इस तरह उनकी बढ़वार पर असर पड़ेगा और पौधे कम फल दे पाएंगे और जल्दी सूख जाएंगे। लौकी और सीताफल के पौधे एक गमले में एक ही हों तो अच्छा। लौकी का एक पौध तैयार होकर अपनी पूरी उम्र में करीब सौ फल दे देता है।
खाद-पानी
सब्जियों में अलग से रासायनिक खाद डालने की जरूरत नहीं होती। अगर पौधा रोपते समय ही प्रयाप्त मात्रा में कंपोस्ट डाल दी जाए, तो बार-बार खाद डालने की जÞरूरत नहीं होती। अगर कंपोस्ट की जगह वर्मी कंपोस्ट डालें, तो पौधे अधिक फल देंगे और उन्हें किसी तरह का रोग नहीं होगा। वर्मी कंपोस्ट आजकल नर्सरियों में आसानी से मिल जाता है।
गरमी के मौसम में सब्जी के पौधों को पानी की अधिक जरूरत होती है, पर एक दिन का अंतर करके पानी डालें, तो भी इनके लिए पर्याप्त होता है। गरमी के मौसम में पानी हमेशा शाम के वक्त डालें, जब सूरज छिप जाए। अगर गरमी तेज पड़ रही हो तो रोज शाम के पानी डालें। एक-दो दिन के अंतर पर सब्जियों के पत्तों पर पानी में सिरका या फिर थोड़ा-सा नमक मिला कर स्प्रे कर दिया करें। स्प्रे भी शाम के वक्त ही करें। इससे पत्तों पर जमा गर्द धुल जाती है और पौधों को नमी मिलती है, जिससे उनका विकास सही तरीके से हो पाता है।
जड़ों से उगाएं
कुछ सब्जियां ऐसी होती हैं, जिन्हें बारहों महीने उगाया जा सकता है, जैसे धनिया पत्ता, पुदीना, हरा प्याज। जब आप बाजार से धनिया पत्ता और पुदीना लाते हैं तो उनके पत्तों वाले हिस्से को अलग करने के बाद डंठल को पानी में रख दें। दो-तीन दिन में उनकी जड़ें फिर से निकल आएंगी। इन जड़ों को गमलों में रोप दें। इस तरह धनिया और पुदीना को दुबारा उगाया जा सकता है। ये दोनों चीजें ऐसी हैं, जो अधिक जगह भी नहीं घेरतीं। एक-एक गमले में भी रोप दें तो रोजमर्रा की जरूरतें पूरी हो सकती हैं। इसी तरह एक चौड़े गमले में प्याज के निचले हिस्से को सुरक्षित रखते हुए उसकी गांठों को मिट्टी में दबा दें। दो-तीन दिन में उसमें कल्ले फूट आएंगे। अगर आप बाजार से प्याज लाते हैं और नमी के कारण उनमें कल्ले निकलने लगते हैं तो उन्हें गमलों में रोप दें। हफ्ते-डेढ़ हफ्ते में हरा प्याज तैयार हो जाएगा। इसी तरह लहसुन की कलियां रोप कर हरा लहसुन तैयार किया जा सकता है। कढ़ी पत्ता का पौधा तो अक्सर घरों में लगाया जाता है। इसी तरह एक गमले में लेमन ग्रास उगाएं। वह घर में हरियाली तो रचेगा ही, चाय में या सब्जियों में इसका पत्ता डालें, तो उसकी खुशबू मजेदार होती है।
इस तरह थोड़ी-सी मेहनत से कम जगह में भी अच्छा-खासा किचन गार्डन तैयार किया जा सकता है। गरमी में ठंडक के एहसास के साथ अपनी मेहनत से उगाई सब्जियां खाने का आनंद भी लिया जा सकता है।

