मानस मनोहर
सूजी के रसेदार पुए
पुआ होली का पारंपरिक व्यंजन है। यह उत्तर भारत में होली के दिन प्राय: हर घर में बनता है। हर इलाके में इसे बनाने के तरीके कुछ भिन्न हैं। पुए के कई रूप भी हैं। कुछ मालपुए बनाते हैं, तो कुछ खस्ता पुए बनाते हैं। कुछ मीठी मोटी पूड़ी की तरह बनाते हैं। आमतौर पर पुए गेहूं के आटे, मैदा या फिर चावल के आटे से बनाए जाते हैं। मगर हम थोड़ा अलग ढंग से, सूजी से चाशनी वाले पुए बनाएंगे, जो खाने में बहुत नरम और लजीज होते हैं। ये ऊपर से कुछ सख्त, पर भीतर से गुलाब जामुन की तरह नरम और रसीले होते हैं। सूजी के पुए बनाना बहुत आसान है। इसके लिए बस थोड़ा धैर्य की जरूरत होती है। यों, जब भी भोजन बनाएं, धैर्य और अच्छे मन से बनाएं, तो उसका स्वाद और सुगंध बढ़ जाता है। हड़बड़ी में पकाया भोजन न तो स्वाद में अच्छा होता है और न सेहत के लिए।
सूजी के पुए बनाने के लिए दो कप सूजी लें। एक कड़ाही या पैन में एक चम्मच घी गरम करें और उसमें सूजी डाल कर मद्धिम आंच पर चलाते हुए सेंकें। ध्यान रखें कि इसके लिए सूजी को हलवे की तरह लाल करने की जरूरत नहीं होती। चलाते हुए सेंकते रहें। जब सूजी से महक उठने लगे, तो उसमें गुनगुना दूध डालते हुए चलाएं। इसमें तीन से चार कप दूध की जरूरत पड़ सकती है। सूजी को चलाते हुए तब तक पकाएं, जब तक कि वह कड़े गुंथे आटे की तरह न हो जाए। हाथ
से दबा कर देखें, मिश्रण ठीक वैसा ही बनना चाहिए, जैसा पूड़ी के लिए आटा गूंथते हैं। फिर आंच बंद कर दें और सूजी को अलग बरतन में निकाल लें। अब इसके लिए चाशनी तैयार कर लें। जितनी सूजी ली है, उतनी ही मात्रा में चीनी लें। उससे थोड़ा कम ले सकते हैं। फिर जितनी चीनी ली है, लगभग उतनी ही मात्रा पानी की रखें। जैसे दो कप चीनी ली है, तो दो कप ही पानी लें। अब इसे एक पैन में डाल कर तेज आंच पर चलाते हुए उबालें। पानी उबलने लगे, तो उसमें चार-छह दाने केसर के डालें। दो-तीन हरी इलाइची के दाने कूट कर भी डाल सकते हैं।
अगर रंग गाढ़ा रखना चाहते हैं तो इसमें एक बूंद केसर का रंग भी डाल सकते हैं। इस चाशनी को बहुत गाढ़ा करने की जरूरत नहीं होती। तार बनने से पहले ही आंच बंद कर दें। अब पुए बनाने की तैयारी करें। जो सूजी पका कर रखी है, उसमें एक से दो चम्मच मिल्क पाउडर डालें और हथेली से रगड़ते हुए अच्छी तरह गूंथ लें। आटा मुलायम हो जाए, तो उसमें से नीबू के आकार की गोलियां लेकर अच्छी तरह दबाते हुए गोले बनाएं और हथेली पर दबा कर चपटा आकार दें। इस पर चाहें तो किसी खांचे या फोक से दबा कर डिजाइन बना लें। जब सारी गोलियां तैयार हो जाएं, तो एक कड़ाही में तेल या घी गरम करें।
घी बहुत अधिक गरम नहीं होना चाहिए। आंच मध्यम रखें। उसमें सूजी की गोलियों को डालें और सुनहरा होने तक पलटते हुए सेंक लें।
चाशनी को देखें। हल्की गरम होनी चाहिए। ज्यादा गरम न हो। सूजी के पुए सेंक कर इस चाशनी में डालते जाएं। जैसे गुलाब जामुन डालते हैं, ठीक उसी तरह। पुओं को पंद्रह-बीस मिनट चाशनी में रखने के बाद बाहर निकाल लें। मेहमान आएं, तो उन्हें परोसें। लजीज, रसेदार पुए सबको पसंद आएंगे।
कांजी वड़े
ली पर गुझिया और मिठाइयां खा-खा कर अक्सर मुंह का स्वाद मीठा हो जाता है। पेट भी भारी-भारी-सा लगने लगता है। ऐसे में मेहमानों को अगर कुछ ऐसा परोसा जाए, जो नमकीन और पाचक हो, तो वे बड़े मजे से खाते हैं। कांजी-वड़े ऐसा ही व्यंजन है। यह खाने में खट्टा और चरपरा होता है, भोजन को पचाने में भी मददगार होता है।
कांजी बनने में आमतौर पर चार से पांच दिन लगते हैं, पर आप इसे बारह से चौबीस घंटों में भी तैयार कर सकते हैं। कांजी बनाने के लिए दो लीटर पानी को गुनगुना गरम कर लें। इसमें आधा लीटर छाछ डालें और इसके साथ ही इसमें एक छोटा चम्मच काला नमक, एक छोटा चम्मच सेंधा नमक और आधा छोटा चम्मच सफेद नमक डालें। एक छोटा चम्मच कुटी लाल मिर्च, आधा चम्मच हींग पाउडर, एक छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर, एक छोटा चम्मच कुटी पीली सरसों और आधा चम्मच कुटी काली मिर्च डाल कर अच्छी तरह मिला लें। अब इस घोल को किसी मिट्टी के बरतन, बर्नी या किसी कांच के जार में डाल कर रखें। जार का मुंह एक कपड़े से बांध कर ढंक दें और इसे रात भर के लिए रख दें।
अगली सुबह चम्मच से चला कर मसालों को एक बार फिर से मिला दें। फिर आप देखेंगे कि दोपहर तक कांजी ठीक-ठाक खट्टी और स्वादिष्ट हो गई है। उसमें सारे मसालों की खुशबू रच गई है। अब इसके लिए वड़े बनाने की तैयारी कर लें। जब कांजी बना कर रखें, उसी वक्त एक कटोरी धुली मूंग दाल और चौथाई कटोरी धुली उड़द भिगो कर रख दें। अगली सुबह इन्हें निथार कर मिक्सर में अच्छी तरह पीस लें। इसमें नमक, जीरा पाउडर, थोड़ी अजवाइन, कुटी लाल मिर्च, कुटी सौंफ और चुटकी भर हींग डाल कर अच्छी तरह फेटें, जब तक कि इसका रंग कुछ-कुछ सफेद न नजर आने लगे। फेंटते समय ध्यान रखें कि एक ही दिशा में फेंटें, इससे वड़े नरम बनते हैं।
अब एक कड़ाही में तेल गरम करें। छोटे-छोटे आकार के वड़े डालते हुए, सुनहरा होने तक तल लें। इसके बाद एक भगोने में गुनगुना पानी लें, उसमें थोड़ा-सा नमक और चुटकी भर हींग डाल लें। तलने के बाद इसी पानी में वड़ों को डालते जाएं। दस मिनट बाद वड़ों को हथेली पर रख कर दबाते हुए निचोड़ें और कांजी में डाल दें। जब भी खाना हो, कांजी सहित वड़े परोसें। ल्ल

