कलकाता के 30बी, हरीश चटर्जी स्ट्रीट की झुग्गी। छह जुलाई, 2000 का दिन। उस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस झुग्गी में पहुंचे थे अपने मंत्रिमंडल की अहम सहयोगी ममता बनर्जी को मनाने की खातिर। तब केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहीं तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी नाराज होकर दिल्ली से कोलकाता चली गई थीं और यह चर्चा आम हो गई थी कि उनकी पार्टी भाजपा नीत राजग छोड़ देगी। ममता बनर्जी ने वाजपेयी के विशेष दूत सुधींद्र कुलकर्णी की बात ही सुनने से मना कर दिया था।
उस दिन शाम साढ़े पांच बजे प्रधानमंत्री वाजपेयी अपने दामाद रंजन भट्टाचार्य, अन्य परिजनों और सुधींद्र कुलकर्णी के साथ तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी को मनाने पहुंचे थे।हालांकि, कहा यही गया कि वे अपनी मंत्रिमंडलीय सहयोगी ममता बनर्जी की मां गायत्री देवी का अभिवादन करने पहुंचे हैं। दक्षिण कोलकाता के कालीघाट इलाके की पतली-सी एक गली में स्थित दीदी कही जाने वाली ममता बनर्जी के झुग्गीनुमा मकान में पहुंचकर वाजपेयी ने उनकी मां के पैर छुए और आशीर्वाद लिए।
प्रधानमंत्री को सामने देख अभिभूत बुजुर्ग गायत्री देवी ने आगंतुक का स्वागत गुलाबों के गुलदस्ते से किया, सिल्क का पीला उत्तरीय पहनाया। मुस्कुराते हुए वाजपेयी ने मां-बेटी के साथ तस्वीर खिंचाई। वाजपेयी की दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्य और पोती निहारिका ने तीनों के बीच बैठकर तस्वीर खिंचाई। ममता बनर्जी की भाभियों ने वाजपेयी के स्वागत में शंख फूंके। उस कमरे में लगभग 20 मिनट ठहरे प्रधानमंत्री और उनके परिजन। अटल जी ने गायत्री देवी से कहा, ‘आपकी बेटी बड़ी गुस्से वाली है। इन्हें बार-बार मनाना पड़ता है।’ सुनकर मुस्कुराते हुए गायत्री देवी ने वाजपेयी की पसंदीदा मिठाई ‘जलभरा संदेश’ की तश्तरी उनके आगे कर कहा, ‘ममता ने कहा कि यह आपकी पसंदीदा मिठाई है।’
ममता बनर्जी ने वहां जमा लोगों को कहा कि प्रधानमंत्री उनसे मिलने निजी दौरे पर पहुंचे थे। वाजपेयी ने कुछ लोगों ने पूछा तो उन्होंने जवाब दिया, ‘कोई राजनीतिक बात नहीं हुई है। ममता बनर्जी ने बंगाल की चार सरकारी कंपनियों के बंद को लेकर चिंता जताई थी। उस बारे में वे दिल्ली पहुंचे तो बात होगी। केंद्र अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगा।’ इस मुलाकात के दौरान वाजपेयी के साथ रहे सुधींद्र कुलकर्णी के मुताबिक, घर पर मुलाकात के दौरान दोनों के बीच में इस मुद्दे पर बात नहीं हुई। अटल जी उनकी मां का हालचाल पूछते रहे। घर के बच्चों को प्यार किया। लेकिन 20 मिनट बाद जब प्रधानमंत्री का काफिला वहां से चार से चार किलोमीटर दूर राजभवन के लिए रवाना हुआ, तब तक बर्फ पिघल चुकी थी।
ममता बनर्जी, उनकी मां और उनके घर के लोग दरवाजे तक सबको छोड़ने आए। ममता ने मिठाइयों के डिब्बे, धोती-कुर्ता और रवींद्र संगीत के कुछ कैसेट उपहार में दिए। दरवाजे पर ममता और उनकी मां ने हाथ जोड़े और कहा, ‘दोबारा आइएगा।’ वाजपेयी मुस्कुरा उठे थे। सहयोगी दलों के नेताओं को जोड़े रखने की वाजपेयी की निजी स्तर पर काम करने की कला को ममता आज भी शिद्दत से याद करती हैं।
