उत्तर प्रदेश में चौदह साल बाद सत्ता में लौटी भाजपा सरकार ने मंगलवार को चालू वित्तीय वर्ष यानी 2017-18 के लिए अपना पहला बजट पेश किया। तीन लाख, चौरासी हजार, छह सौ उनसठ करोड़ रुपए का यह अब तक का राज्य में सबसे बड़ा बजट है, जो पिछली अखिलेश सरकार से 10.9 फीसद अधिक है। हालांकि, इसमें अपने ‘लोक कल्याण संकल्प पत्र’ में किए गए कई वादों से दूरी बना कर रखी गई है, फिर भी कई मोर्चों पर संतुलन बनाने की कोशिश साफ दिखती है। एक तरफ किसानों, नौजवानों और गरीबों को ध्यान में रखा गया है तो दूसरी तरफ अपने सांस्कृतिक एजेंडे के अनुरूप अयोध्या, मथुरा और काशी का भी खास खयाल रखा गया है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड के लिए विशेष योजनाओं की व्यवस्था की गई है तो कानपुर, वाराणसी, आगरा और गोरखपुर में मेट्रो रेल चलाने के लिए भी बजट का प्रावधान रखा गया है।
बजट का एक उल्लेखनीय पहलू महिलाओं से भी जुड़ा है। और जैसा कि बजट भाषण में दावा भी किया गया कि महिला उत्पीड़न के मामलों को जल्द निपटाने के लिए सरकार ने एक सौ अपर जिला जज स्तर की अदालतें खोलने के लिए बीस करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। राजनीतिक रूप से बेहद महत्त्वपूर्ण और देश के सबसे बड़े राज्य के इस बजट पर लोगों की निगाहें लगी थीं, तो यह स्वाभाविक ही था। मीडिया में अगर इसे भाजपा सरकार का बजट कहने के बजाय योगी सरकार का बजट बताने पर ज्यादा जोर दिखाई दिया है तो इसके भी अपने मायने हैं। दरअसल, योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी कार्यशैली और तौर-तरीकों पर ज्यादा ही ध्यान दिया जा रहा है। इसलिए यह बजट भी एक तरह से योगी सरकार की परीक्षा ही कही जाएगी। इस बजट में योगी सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों के एक लाख रुपए फसली ऋण की माफी के लिए छत्तीस हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसे सरकार का साहसिक फैसला कहा जाना चाहिए। वैसे तो भाजपा के चुनावी वादों में कर्जमाफी की बात कही गई थी, लेकिन सरकार के सामने धनराशि की व्यवस्था के लिए जो जद्दोजहद देखी जा रही थी, उसमें थोड़ी आशंका जरूर बनी हुई थी।
सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम से गरीबों के लिए तीन सौ करोड़ रुपए की नगर विकास योजना का एलान किया है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड को लेकर भारतीय जनता पार्टी लंबे अरसे से विशेष पैकेजों की मांग करती रही है, क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तुलना में ये दोनों इलाके आर्थिक रूप से काफी विपन्न हैं। इसलिए पूर्वांचल के लिए तीन सौ करोड़ और बुंदेलखंड के लिए दो सौ करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए ‘स्वदेश दर्शन योजना’ के तहत अयोध्या में रामायण सर्किट, वाराणसी में बौद्ध सर्किट और मथुरा में कृष्ण सर्किट के लिए 1240 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इस सबके बावजूद सेहत और शिक्षा के मोर्चे पर कहीं ज्यादा ध्यान की जरूरत थी। इन दोनों क्षेत्रों में बढ़ते निजीकरण ने स्थिति को विकराल बना दिया है। इसके अलावा, महिला सुरक्षा और वृद्धों की स्थिति को लेकर भी ज्यादा संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए था।

