यूरोपीय महाद्वीप के सबसे बड़े देश फ्रांस में नेपोलियन के बाद उनतालीस साल के दूसरे सबसे युवा शासक यानी राष्ट्रपति के तौर पर चुने गए मध्यमार्गी इमैनुएल मैक्रोन की जीत को भूमंडलीकरण और मुक्त बाजार व्यवस्था की जीत माना जा रहा है। दूसरे दौर के मतदान में उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी दक्षिणपंथी नेशनल फ्रंट की प्रत्याशी मरीन ला पेन को भारी अंतर से करारी शिकस्त दी। मैक्रोन को जहां पैंसठ फीसद मत मिले, वहीं ला पेन को महज पैंतीस फीसद। फ्रांस के राष्ट्रपति पद की चुनाव प्रणाली ऐसी है कि विजयी प्रत्याशी के लिए पचास फीसद से अधिक मत पाना अनिवार्य है। चुनाव के पहले दौर में कई प्रत्याशियों के बीच कड़े मुकाबले में मैक्रोन 23.75 फीसद मत पाकर पहले स्थान पर आए और ला पेन 21.53 फीसद मत पाकर दूसरे नंबर पर रहीं। दूसरे चरण में केवल इन दोनों के बीच मुकाबला हुआ, जिसमें मैक्रोन विजयी घोषित किए गए। जहां मरीन ला पेन फ्रांस को यूरोपीय संघ से अलग करने, आव्रजकों के खिलाफ कड़े नियम-कायदे लागू करने के लिए वोट मांग रही थीं, वहीं मैक्रोन यूरोपीय संघ में बने रहने तथा अर्थव्यवस्था को और खुला बनाने की पैरोकारी कर रहे थे।

चुनाव में एक दूसरे के खिलाफ चरित्र हनन के अभियान भी चले। छह करोड़ साठ लाख आबादी वाले इस देश में मुसलमानों की आबादी करीब पचास लाख है। पिछले कुछ सालों से फ्रांस में कई आतंकी हमले हुए हैं। इसलिए ‘इस्लामी आतंकवाद’ भी मुद््दा बना, लेकिन वह ज्यादा असरकारी नहीं रहा। मैक्रोन की जीत पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राष्ट्र प्रमुखों ने उन्हें बधाई दी है। तमाम औपचारिक बधाइयों के बीच यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जीन क्लाउड जंकर की प्रतिक्रिया के गहरे मतलब निकाले जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि मैक्रोन की जीत से वे खुश हैं, क्योंकि मजबूत यूरोप की जो बात उन्होंने कही थी, अब अपने राष्ट्रपतित्व काल में वे उस पर अमल करेंगे। फ्रांस के निवर्तमान राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के मुताबिक मैक्रोन की भारी जीत बताती है कि लोग सशक्त गणतंत्र और यूरोपीय संघ से एकजुटता चाहते हैं। गौरतलब है कि मैक्रोन इससे पहले ओलांद के मंत्रिमंडल में दो साल वित्तमंत्री रहे थे।

जर्मन चांसलर एंजला मरकेल ने कहा कि यह जीत मजबूत यूरोपीय संघ और जर्मनी-फ्रांस की दोस्ती के नाम है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वे फ्रांस के नए राष्ट्रपति के साथ काम करने को उत्सुक हैं। गौरतलब है कि फ्रांस में दक्षिण और वाम, दोनों तरह के राजनीतिक दल दशकों से सक्रिय रहे हैं। अपनी नई पार्टी बना कर मैक्रोन ने एक इतिहास रचा। पहली बार ऐसा हुआ कि अंतिम मुकाबले में न तो कोई परंपरागत वाम या समाजवादी पार्टी थी, न कंजरवेटिव पार्टी। मैक्रोन को खुले बाजार और भूमंडलीकरण का समर्थक माना जाता है। पेशे से बैंकर और अर्थनीति के गहरे जानकार हैं वे। उन्होंने अपनी जीत पर कहा कि यह नई संभावनाओं के अध्याय की शुरुआत है। देखना है कि लोगों ने उनसे जो उम्मीदें बांधी हैं उन पर वे कहां तक खरे उतरते हैं।