लंदन में राष्ट्रमंडल देशों की बैठक से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश, सेशल्स और मॉरीशस सहित कुछ देशों के शासन प्रमुखों से मुलाकात की। इसमें बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ हुई मुलाकात को काफी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने आपसी हितों के मुद्दों पर खुल कर विचार-विमर्श किया। इससे पता चलता है कि पड़ोसी के नाते भारत बांग्लादेश को कितनी अहमियत देता है। पिछले तीन साल के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में काफी प्रगाढ़ता आई है। वर्ष 2015 में मोदी बांग्लादेश गए थे और पिछले साल शेख हसीना भारत आर्इं थीं। दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात को इस लिहाज से भी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है कि शेख हसीना फिर भारत के दौरे पर आने वाली हैं। बांग्लादेश और अन्य शासन प्रमुखों के साथ मोदी की मुलाकात के दूरगामी संदेश हैं। लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी से मोदी नहीं मिले। यह पाकिस्तान को एक तरह से यह आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की नाराजगी का संदेश है। दिसंबर 2015 के बाद से भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नहीं मिले हैं। पठानकोट में हुए आतंकवादी हमले और उरी में थलसेना के शिविर पर हुए आतंकवादी हमले के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव रहा है।
बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्ते न सिर्फ कारोबारी लिहाज से, बल्कि भौगोलिक, कूटनीतिक और सामरिक लिहाज से भी काफी अहमियत रखते हैं। जिस तरह से चीन अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में पाकिस्तान के समर्थक के रूप में सामने आया है, वह भारत के लिए चिंता का विषय है। चीन और पाकिस्तान की ओर से मिल रही चुनौतियों के मद्देनजर भारत के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह बांग्लादेश के साथ रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाए। पिछले साल शेख हसीना की भारत यात्रा के दौरान ऐसे कई समझौते हुए जो दोनों देशों के हितों को साझा करते हैं। हालांकि घुसपैठ जैसे भी कुछ मसले उठे, जिनका दोनों देशों ने मिलकर समाधान निकालने का संकल्प किया। दोनों देशों ने आतंकवाद से मिल कर लड़ने की कसम खाई। रक्षा, सुरक्षा और नाभिकीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बाईस समझौते हुए थे। भारत ने बांग्लादेश को अट्ठाईस हजार करोड़ रुपए का कर्ज दिया। बांग्लादेश को बिजली आपूर्ति बढ़ाने और डीजल आपूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाने का करार हुआ था।
कुल मिला कर शेख हसीना की पिछले साल की भारत यात्रा द्विपक्षीय रिश्तों में मील का पत्थर साबित हुई थी। इससे पहले जब 2015 में भारत के प्रधानमंत्री बांग्लादेश गए थे तो चार दशक से भी ज्यादा पुराने जमीन की अदला-बदली के मामले को निपटाया था। बांग्लादेश की सीमाएं असम, पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा से मिलती हैं। ऐसे में भौगोलिक लिहाज से भी भारत के लिए बांग्लादेश एक अहम पड़ोसी है। इसलिए राष्ट्रमंडल शासन प्रमुखों की बैठक से अलग मुलाकातों का जो दौर हुआ, उसमें भारत के प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश को खास तरजीह दी। क्या यह नई शुरुआत का संकेत है!
