महंगाई के ताजा आंकड़ों ने हालांकि राहत की खबर दी है, पर इसके साथ कई अगर-मगर हैं। एक तो यह राहत बहुत मामूली है। दूसरे, ऐसे कई कारक मौजूद हैं जो आने वाले दिनों में महंगाई का ग्राफ चढ़ा सकते हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक थोक महंगाई दर इस साल मार्च में तनिक घट कर 2.47 फीसद पर आ गई। फरवरी में यह 2.48 फीसद थी। जाहिर है, जो फर्क दिखा है वह एकदम मामूली है। अलबत्ता पिछले साल से तुलना करें, तो फर्क ज्यादा दिखता है। पिछले साल मार्च में थोक महंगाई दर 5.11 फीसद थी। इस साल फरवरी के मुकाबले मार्च में आई हल्की-सी कमी के पीछे दालों और सब्जियों की कीमतों में आई गिरावट है। पर यह कीमतों में कोई स्वाभाविक कमी नहीं है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसका दंश किसानों को झेलना पड़ रहा है। मसलन, देश की अधिकतर प्रमुख मंडियों में दालों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य से बीस से पच्चीस फीसद कम पर हो रही है। थोक महंगाई दर में दिखी थोड़ी-सी कमी का कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में आई नरमी है। अलबत्ता आलू और प्याज के भावों में तेजी बरकरार रही। थोक की तरह खुदरा महंगाई दर में भी कमी दर्ज हुई है।
पिछले हफ्ते सरकार ने खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी किए थे, जिनके मुताबिक खुदरा महंगाई घट कर मार्च में 4.28 फीसद पर आ गई, जो कि पिछले पांच महीनों का न्यूनतम स्तर है। लेकिन यह भी ध्यान में रखने की बात है कि सरकार कई बार अपने आकलन में संशोधन करती है। मसलन, जनवरी में थोक महंगाई दर 2.84 फीसद बताई गई थी, पर संशोधित आकलन में यह 3.02 फीसद निकली। क्या पता ताजा आंकड़े संशोधित रूप में आएं, तो जो मामूली-सी गिरावट फिलहाल नजर आई है वह नदारद हो जाए। मौसम विभाग ने सामान्य मानसून की भविष्यवाणी की है। इससे कृषि की तरफ से महंगाई बढ़ने का दबाव शायद नहीं होगा। लेकिन अकसर देखा गया है कि फसल जब किसान के पास से व्यापारियों के पास पहुंच जाती है, तो उसकी कीमत तेजी से बढ़ जाती है। बहरहाल, क्या थोक महंगाई दर में दिखी हल्की-सी कमी को एक रुझान माना जा सकता है? कहना मुश्किल है, क्योंकि महंगाई बढ़ाने वाले कई कारक मौजूद हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत सत्तर डॉलर प्रति बैरल पर चल रही है। यही नहीं, सऊदी अरब जैसा प्रमुख तेल उत्पादक देश इसे अस्सी डॉलर तक ले जाने का इरादा जता चुका है। इसी के मद््देनजर पिछले दिनों दिल्ली में संपन्न हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मंच के सम्मेलन में, जिसमें तेल निर्यातक देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे, प्रधानमंत्री ने तेल की कीमतों में अतार्किक वृद्धि के प्रति चेताया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस की भी कीमत बढ़ने का ही रुझान है। सीरिया का संकट भी तेल के दाम में बढ़ोतरी का एक कारण बन सकता है। पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी होगी, तो परिवहन और ढुलाई की लागत बढ़ जाएगी, और जाहिर है फिर इसका असर बहुत सारी चीजों की मूल्यवृद्धि के रूप में आ सकता है। फिर, हाल में डॉलर के मुकाबले रुपए के मूल्य में आई कमी भी महंगाई बढ़ने का सबब बन सकती है। लिहाजा, थोक महंगाई दर के ताजा आंकड़ों में जो थोड़ी-सी नरमी दिखी है उसे फिलहाल न तो टिकाऊ रुझान माना जा सकता है न सुचिंतित रूप से उठाए गए किन्हीं कदमों का परिणाम।
