संयुक्त अरब अमीरात के दो दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यों तो वहां के शाह मोहम्मद बिन जायद अल शाह से कई मुद्दों पर बातचीत हुई, और इस मौके पर दोनों देशों के बीच पांच समझौते भी हुए, पर जो बात सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है वह है आतंकवाद के खिलाफ समान नजरिया। इस अवसर पर जारी साझा बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद को प्रायोजित करने या इसका समर्थन करने और इसे राज्य-नीति के औजार के तौर पर इस्तेमाल करने आदि की निंदा की है। यह ऐसी शब्दावली है जिसका इस्तेमाल भारत आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को घेरने के लिए करता आया है। इसलिए सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि साझा बयान में बगैर नाम लिये पाकिस्तान की तरफ इशारा किया गया है। विश्व व्यापार के एक बड़े केंद्र और खाड़ी क्षेत्र के अहम देश संयुक्त अरब अमीरात का आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के सुर में सुर मिलाना मायने रखता है। यों यह पहली बार नहीं है जब दोनों देशों ने आतंकवाद की निंदा की है। 2017 में, जब संयुक्त अरब अमीरात के शाह भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के मेहमान के तौर पर दिल्ली आए थे, तब भी दोनों देशों ने आतंकवाद का समर्थन करने या उसे धार्मिक रंग देने के प्रयासों की निंदा की थी। लेकिन तब के बयान और ताजा बयान में काबिलेगौर फर्क है।

दो रोज पहले जारी हुए साझा बयान में आतंकवाद तथा उग्रवाद के सभी रूपों की कड़े शब्दों में निंदा की गई है, चाहे उसके पीछे हाथ किसी का भी हो। इसी के साथ इस पर अफसोस जताया गया है कि कुछ देश राजनीतिक मुद्दों को धार्मिक या सांप्रदायिक रंग देने से बाज नहीं आते। इस साझा बयान में पाकिस्तान का नाम कहीं नहीं आया है, पर उसकी तरफ संकेत में रही-सही कसर दोऔर बातों से पूरी हो जाती है। एक, जब भी किसी आतंकी हमले के तार पाकिस्तान से जुड़े होने के तथ्य सामने आते हैं, पाकिस्तान यह कह कर पल्ला झाड़ लेता है कि यह कारगुजारी ‘गैर-सरकारी’ तत्त्वों ने की है, ये उसकी नुमाइंदगी नहीं करते, लिहाजा उसकी कोई जवाबदेही नहीं बनती। भारत और संयुक्त अरब अमीरात के साझा बयान में कहा गया है कि यह तमाम देशों का उत्तरदायित्व है कि वे ऐसे तथाकथित गैर-सरकारी तत्त्वों की गतिविधियों पर अंकुश लगाएं और उन आतंकवादियों को मिलने वाली हर तरह की मदद के सारे रास्ते बंद करें, जो अपने देश की जमीन से अन्य देशों के खिलाफ साजिशें रचते और आतंकी हमले करते हैं। दो, साझा बयान में आतंकवाद से निपटने के लिए मजबूत और विश्वसनीय कदम उठाने की वकालत करते हुए यह भी कहा गया है कि आतंकवादियों के लिए दुनिया में कहीं भी पनाहगाह या अभयारण्य नहीं होना चाहिए।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में एक व्यापक समझौते का प्रस्ताव पेश कर रखा है। इस पर मोटामोटी आम सहमति के बावजूद, इसमें दी गई आतंकवाद की परिभाषा को लेकर कई देशों को एतराज है। लेकिन संयुक्त अरब अमीरात ने इस समझौते को मान्य कराने के लिए भारत के साथ मिलजुल कर प्रयास करने का साझा संकल्प जताया है। ऐसे वक्त जब भारत कश्मीर में आतंकी हमलों का सामना कर रहा है, यह संकल्प भारत की कोई सीधी मदद तो नहीं करता, पर यह भरोसा जरूर दिलाता है कि घुसपैठ और सीमापार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव दिनोंदिन और बढ़ता जाएगा।