आखिरकार अन्नाद्रमुक पर शशिकला के कब्जे को लेकर उसके वरिष्ठ नेता विद्रोह पर उतर आए हैं। रविवार को जब वीके शशिकला को अन्नाद्रमुक के विधायक दल का नेता चुन लिया गया और कार्यकारी मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया तो शशिकला के तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया था। मगर उसके दो दिन बाद पन्नीरसेल्वम ने यह कह कर विवाद पैदा कर दिया कि उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया था। उनके बाद अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पीएच पांडियन ने कहा कि शशिकला में पार्टी प्रमुख या मुख्यमंत्री बनने की योग्यता नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि जयललिता की मृत्यु में शशिकला का हाथ है और इसकी जांच होनी चाहिए। जयललिता को शशिकला के परिजनों ने घर में धक्का दे दिया था और गिरने के कारण वे गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। फिर उनकी मृत्यु के बाद शशिकला ने दबाव बना कर पार्टी के लोगों को अपने पक्ष में कर लिया। शशिकला का विधायक दल का नेता चुना जाना नियम के विरुद्ध है। इस तरह शशिकला के खिलाफ माहौल गरमा गया है।
जयललिता की मृत्यु के बाद जिस तरह शशिकला पार्टी पर अपना अधिकार जमाने को लेकर सक्रिय हो गई थीं, उसी से उनकी महत्त्वाकांक्षा जाहिर हो गई थी। हालांकि शुरू से जयललिता की भतीजी दीपा जयकुमार शशिकला की इन हरकतों पर अंगुली उठाते हुए उन्हें चुनौती दे रही थीं, मगर पार्टी कार्यकर्ताओं की चुप्पी के चलते शशिकला के विरोध में माहौल नहीं बन पा रहा था। पार्टी के कार्यकर्ता निष्ठा और जयललिता के प्रति सम्मान के चलते चुप्पी साधे हुए थे और आखिरकार शशिकला उसका लाभ उठाने में कामयाब हो गई थीं। अब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के विरोध के चलते उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। शशिकला न तो कभी सक्रिय राजनीति में रहीं और न अन्नाद्रमुक ने उन्हें कभी किसी महत्त्वपूर्ण पद के लायक समझा। जयललिता उन्हें पार्टी में ले जरूर आई थीं, पर न तो उन्हें कभी चुनाव लड़ने का मौका दिया और न पार्टी में कोई जिम्मेदारी सौंपी। जब भी जरूरत पड़ी, उन्होंने पन्नीरसेल्वम को अपनी जगह सौंपी, चाहे वह आय से अधिक संपत्ति के मामले में पद छोड़ना पड़ा हो या फिर अस्पताल में भर्ती होने के बाद।
ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठ रहा था कि आखिर किस योग्यता के बल पर पार्टी ने शशिकला को विधायक दल का नेता चुन लिया। क्या उनका इस तरह विधायक दल का नेता चुना जाना कानूनन सही है? अब आमतौर पर कम बोलने वाले पन्नीरसेल्वम ने कहा है कि उन पर दबाव डाल कर पद से हटने को कहा गया, तो उसका असर पार्टी कार्यकर्ताओं पर पड़ेगा, पार्टी के जनाधार पर पड़ेगा और स्वाभाविक ही शशिकला के खिलाफ पूरे तमिलनाडु में माहौल बनेगा। जयललिता के प्रति लोगों के मन में जो सम्मान था, वह शशिकला के प्रति नहीं हो सकता। फिर पांडियन के इस आरोप से लोगों का गुस्सा भड़क सकता है कि उनके ही परिजनों ने जयललिता को धक्का दिया था, जिसके कारण चोट लगी और उनकी मृत्यु हो गई। ऐसे में जोड़-तोड़ करके मुख्यमंत्री की कुर्सी हथियाने की शशिकला की कोशिशों को धक्का पहुंचा है। देर से ही सही, अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की कमान और जयललिता की विरासत को हथियाने की गलत कोशिशों को बेनकाब करने की साहसिक पहल की है।

