प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की बैठक में केंद्र और राज्यों के एकजुट होकर काम करने का संकल्प एक बार फिर दोहराया गया। दिल्ली और पश्चिम बंगाल को छोड़ कर बाकी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस बैठक में शिरकत की। प्रधानमंत्री ने नीतियों के निर्धारण में राज्यों की भी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने का वचन दिया। केंद्रीय योजनाओं, स्किल इंडिया, डिजिटल पेमेंट, स्वच्छ भारत अभियान आदि को सफल बनाने के लिए मुख्यमंत्रियों की राय ली जाएगी। केंद्र का राज्य सरकारों को साथ लेकर आगे बढ़ने की इस पहल से बेहतर नतीजों की उम्मीद बनती है। इसकी पहली और दूसरी बैठकों में भी केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों को प्रगाढ़ बनाने और नीति आयोग को दोनों के बीच पुल की तरह काम करने का विचार रखा गया था। तब गरीबी दूर करने और कृषि क्षेत्र में विकास संबंधी योजनाएं तैयार करने के लिए मुख्यमंत्रियों के तीन समूह बनाए गए थे। ताजा बैठक में पिछली बैठकों में किए गए फैसलों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।
केंद्र की योजनाओं की कामयाबी काफी कुछ इस बात पर निर्भर करती है कि राज्य सरकारें उसमें कितना सहयोग कर रही हैं। इस लिहाज से नीति आयोग से राज्य सरकारों के साथ बेहतर तालमेल बनाने की उम्मीद स्वाभाविक है। आमतौर पर विपक्षी दलों वाली राज्य सरकारों का केंद्रीय योजनाओं के प्रति रवैया ढिलाई का ही देखा जाता है। अक्सर केंद्र से अपेक्षित सहयोग न मिल पाने या फिर उस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ती देखी जाती हैं। इस तरह योजनाएं अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पातीं। नरेंद्र मोदी सरकार ने कई महत्त्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की है। उनमें स्वच्छ भारत अभियान को शुरू हुए दो साल से ऊपर हो गए, मगर इस दिशा में कोई उल्लेखनीय नतीजा सामने नहीं आ पाया है। नदियों की गंदगी दूर करने के लिए जैसे व्यावहारिक कदम उठाए जाने चाहिए थे, अभी तक नहीं उठाए जा सके हैं। यही हाल कृषि क्षेत्र के लिए तैयार की गई योजनाओं का है। स्किल इंडिया और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की दिशा में अभी तक अपेक्षित गति नहीं आ पाई है। ऐसे में प्रधानमंत्री की चिंता समझी जा सकती है।
मगर योजनाओं को गति मिलने का भरोसा केवल नीति आयोग की बैठकों में मुख्यमंत्रियों के साथ बैठ कर अच्छे विचारों को परोसने भर से शायद ही पैदा हो। आयोग की ताजा बैठक उन्नीस महीने बाद हुई है। अभी तक तीन बैठकों में महज नीति आयोग की भूमिका को व्याख्यायित करने पर जोर रहा है। मुख्यमंत्रियों से सहयोग की अपेक्षा की गई है। नीति आयोग ने अब तक योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की समीक्षा करके कोई उल्लेखनीय नतीजा सामने नहीं रखा है। इसलिए कैसे कहा जा सकता है कि केंद्र की योजनाओं को गति प्रदान करने में उसकी भूमिका कितनी कारगर है और केंद्र व राज्यों के बीच वह कितना भरोसेमंद पुल का काम कर रहा है। जिन राज्यों में विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर काम हुए हैं, नीति आयोग को उनसे प्रेरणा लेते हुए केंद्र की योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद पहुंचाने और सरकार से बाहर के विशेषज्ञों को अपने साथ जोड़ कर कार्यक्रमों को कारगर बनाने की जिम्मेदारी है। मगर इस मामले में अब तक ढीला-ढाला रवैया ही देखा गया है। राज्यों से बेहतर संबंधों और नतीजों के लिए केंद्र को भी अपने कुछ आग्रहों से मुक्त होना होगा।
