अमेरिका के लास वेगास में अंधाधुंध गोलीबारी की घटना के पीछे अभी तक किसी आतंकी समूह के होने की बात सामने नहीं आई है। लेकिन इस हमले की प्रकृति को देखते हुए इसमें आतंकी साजिश की आशंका जाहिर की जा रही है। गौरतलब है कि वेगस स्ट्रिप में एक संगीत समारोह के दौरान वहां बीस हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे और वहीं पास के एक होटल की बत्तीसवीं मंजिल पर स्थित कमरे से स्टीफन पैडॉक नाम के एक व्यक्ति ने लगातार गोलीबारी की। इस घटना में उनसठ लोगों की मौत हो गई और पांच सौ से ज्यादा घायल हुए। जब तक पुलिस अधिकारी उस तक पहुंचते, तब तक उसने खुद को खत्म कर लिया। जाहिर है, इसके बाद यह पता लगाना ज्यादा मुश्किल हो गया है कि हमला किसी आतंकी साजिश का नतीजा था या फिर एक सिरफिरे व्यक्ति ने अपनी सनक में इतने लोगों को मार डाला। जिस कमरे से उसने हमला किया था, वहां से दस राइफलों के साथ-साथ उन्हें स्वचालित करने वाली तकनीक भी बरामद होना सुनियोजित साजिश की ओर संकेत करता है।

शुरू में इस आशंका को आइएस के एक दावे से भी बल मिला, जिसमें उसने हमले की जिम्मेदारी लेने की बात कही। लेकिन अगर खुद अमेरिका की खुफिया एजेंसियों और वहां की पुलिस का कहना है कि इस हमले का आतंकवाद से कोई संबंध नहीं है तो फिलहाल आगे की जांच के नतीजों का इंतजार किया जाना चाहिए। यों अमूमन हर बड़े आतंकी हमले के बाद आइएस या तालिबान जैसे आतंकवादी संगठन उसकी जिम्मेदारी लेने का दावा कर देते हैं। इस तरह के दावों से उनके खौफ का विस्तार होता है, भले ही हमले को किसी और ने अंजाम दिया हो। विडंबना यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मसले पर अलग-अलग देशों के बीच सहयोग और तमाम कवायदों के बावजूद आतंक पर काबू पाना अब तक मुमकिन नहीं हो सका है। लेकिन इससे इतर अमेरिका में गोलीबारी की घटनाएं वहां की एक अन्य बड़ी समस्या से जुड़ी हुई हैं। वहां बंदूक या पिस्तौल रखना आम बात है और किसी व्यक्ति से हथियार खरीदने वाले लोगों का न्यायिक रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है। तीन साल पहले के एक आंकड़े के मुताबिक अमेरिका में पुलिस और नागरिकों के पास हथियारों की संख्या सैंतीस करोड़ थी, जबकि वहां की कुल आबादी तब बत्तीस करोड़ थी।

ऐसे कई वाकये हो चुके हैं कि किसी रेस्तरां, होटल या फिर जमावड़े पर अचानक किसी सिरफिरे ने गोलीबारी शुरू कर दी और बड़ी तादाद में लोग मारे गए। 2014 में अमेरिका में हत्या के कुल दर्ज करीब सवा चौदह हजार मामलों में अड़सठ फीसद में बंदूकों का इस्तेमाल किया गया था। खुद सरकार की ओर से कराए गए एक अध्ययन में यह तथ्य सामने आया था कि अमेरिका में सत्रह साल से कम उम्र के करीब तेरह सौ बच्चे हर साल बंदूक से घायल होते हैं। यह बेवजह नहीं है कि लास वेगास की घटना को भी वहां बंदूक रखने के गैरजरूरी शौक से होने वाले नुकसान से जोड़ कर देखा जा रहा है। हालांकि वहां हथियार रखने के शौक के बरक्स इसका विरोध भी होता रहा है। लेकिन इसे अब तक नियंत्रित नहीं किया जा सका है। 9/11 के बाद अमेरिका ने आतंकी हमलों पर काबू पाने के लिए ठोस कवायदें की हैं और इसका असर भी दिखा है। लेकिन आंतरिक सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए अमेरिकी प्रशासन को ‘बंदूक संस्कृति’ पर भी अंकुश लगाना होगा।