कहने को भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर तकनीकी रूप से संघर्ष विराम लागू है। लेकिन सच यही है कि काफी दिनों से पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ जिस तरह का रवैया अख्तियार कर रखा है, लगता नहीं कि उसके लिए समझौते का कोई अर्थ है। सोमवार को एक बार फिर पाकिस्तानी सेना ने पुंछ और राजौरी जिलों में गोलीबारी की, जिसमें एक छह साल की बच्ची साजिदा कफील की जान चली गई और एक भारतीय जवान मुदस्सर अहमद शहीद हो गया। यह अकेली घटना नहीं है। हाल ही में राजौरी के मंजाकोट इलाके में भी पाकिस्तान ने बिना किसी वजह के भारतीय सीमा की ओर गोलीबारी की, जिसमें लांसनायक मोहम्मद नसीर शहीद हो गए थे। पाकिस्तान की ऐसी हरकत तभी रुकती है, जब भारत की ओर से करारा जवाब दिया जाता है। सवाल यह है कि आखिर किन वजहों से पाकिस्तान को बिना वजह के संघर्ष विराम का उल्लंघन करना जरूरी लगता है? क्या वह आंतरिक मोर्चे पर राजनीतिक उथल-पुथल से लोगों का ध्यान बंटाना चाहता है?

भारतीय सेना की चौकियों पर गोलीबारी करने या मोर्टार दागने की जरूरत पाकिस्तान को क्यों महसूस होती रहती है? क्या इससे यह साबित नहीं होता कि पाकिस्तान शायद अपनी ओर से सीमा पर तनाव को कम करने का पक्षधर नहीं है? तब किस आधार पर यह उम्मीद की जाए कि दूसरे मोर्चे पर कूटनीतिक संवाद भी कायम रहे! ऐसा लगता है कि पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौतों या दो देशों के बीच आपसी सहमति के आधार पर तय नियमों की कोई अहमियत नहीं है। दूसरी ओर, भारत की ओर से उकसावे की कोई कार्रवाई नहीं किए जाने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान भारत के खिलाफ माहौल बनाने का कोई भी मौका नहीं चूकता और कई बार विश्व समुदाय के सामने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करता है।

यह हकीकत किसी से छिपी नहीं है कि नियंत्रण रेखा पर बेवजह गोलीबारी करने का एक मकसद भारतीय सेना का ध्यान खींच कर पाकिस्तानी घुसपैठियों को भारत में दाखिल कराना भी रहा है। इस रास्ते वह किसी तरह कश्मीर में अशांति के हालात बनाए रखना चाहता है, ताकि उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ शिकायत करने का मौका मिलता रहे। विश्व का शायद ही कोई देश पाकिस्तान की दलीलों पर विश्वास करने के लिए तैयार होता है और वह दिनोंदिन दुनिया भर में अलग-थलग पड़ता जा रहा है! ऐसा शायद इसलिए भी है कि हाल के दिनों में इस तरह की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें पाकिस्तान की ओर से आए हमलावरों ने शहीद भारतीय सैनिकों के शव को क्षत-विक्षत कर दिया। इसके अलावा, जब भी भारत में कोई आतंकी हमला होता है तो उसके तार किसी न किसी तरह पाकिस्तान में शरण पाए आतंकी गिरोहों से जुड़ते हैं। मगर क्या यह भी सच नहीं है कि पाकिस्तान के आतंकी तत्त्वों को संरक्षण देने का खमियाजा वहां के आम नागरिक भी भुगत रहे हैं? तो क्या वह अपने भीतरी हालात से ठीक से नहीं निपट पाने में नाकामी के कारण लोगों का ध्यान बंटाने के लिए उकसावे की कार्रवाई करता है?