तमाम कोशिशों के बावजूद देश में आतंकवाद की समस्या पर पूरी तरह काबू पाना अगर आज भी मुमकिन नहीं हो सका है तो इसकी वजह आतंकी गतिविधियों में लगे लोगों को गोपनीय स्रोतों से मिलने वाली आर्थिक मदद है। जबकि यह बात लंबे समय से कही जाती रही है कि जब तक आतंकियों को आर्थिक मदद पहुंचाए जाने के तंत्र को ध्वस्त नहीं किया जाएगा, तब तक इस समस्या से पार पाना मुश्किल है। हालांकि पिछले कुछ महीनों के दौरान एनआइए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने खासतौर पर आतंकवाद की समस्या के इस पहलू पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया है। सुरक्षा एजेंसियों ने खासतौर पर आतंकियों के संबंधियों और हवाला के जरिए या फिर किसी और रास्ते से उन्हें धन पहुंचाने वालों के खिलाफ अपनी सख्ती बढ़ा दी है। इसी क्रम में एनआइए को मंगलवार को एक बड़ी कामयाबी मिली जब उसने आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के बेटे सैयद शाहिद यूसुफ को गिरफ्तार कर लिया। शाहिद पर हवाला मामले में आतंकी स्रोतों से धन प्राप्त करने का आरोप है। एनआइए के मुताबिक शाहिद के पास 2011 से 2014 के बीच सलाहुद्दीन के इशारे पर सीरिया के रास्ते चार किस्तों में रकम भेजे जाने के सबूत हैं, जिसका इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में किया गया।

गौरतलब है कि शाहिद जम्मू-कश्मीर सरकार के तहत कृषि विभाग में कार्यरत है और अब तक वह एक सामान्य नागरिक की तरह ही जिंदगी गुजार रहा था। अब अगर उस पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि आतंकी संगठनों की पहुंच कहां तक है और इस समस्या पर काबू पाना आज भी जटिल काम है तो उसकी वजह क्या है! सवाल है कि सरकारी महकमे में काम करते हुए शाहिद यूसुफ कैसे इतने समय से बिना रोक-टोक आतंकी स्रोतों से धन प्राप्त करता रहा और उसके बारे में किसी को भनक नहीं लगी! हालांकि यह भी सच है कि पिछले कुछ समय से जम्मू-कश्मीर में खुफिया तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल देखा जा रहा है और जमीनी स्तर पर इसके सकारात्मक नतीजे भी सामने आ रहे हैं, चाहे वह आतंकी गतिविधियों में लिप्त लोगों की गिरफ्तारी हो या फिर आतंकवादी हमलों का सामना। एनआइए ने आतंकवादी गतिविधियों के वित्त पोषण से जुड़े आरोपों के तहत अब तक दस लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अलगाववादी नेता अली शाह गिलानी का दामाद अल्ताफ शाह और वाताली भी शामिल हैं।

यह अब जगजाहिर तथ्य है कि कश्मीर में हिंसा और उपद्रव को पाकिस्तान की तरफ से लगातार शह मिलती रही है। इसमें न केवल कश्मीर के नौजवानों को भड़का कर आतंकवादी संगठनों में शामिल करके पाकिस्तान में स्थित शिविरों में प्रशिक्षण दिया जाता है, बल्कि भारत में आतंकी गतिविधियां चलाने के लिए आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई जाती है। भारत ने अनेक मौकों पर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह सवाल उठाया है, लेकिन पाकिस्तान आमतौर पर इसमें अपनी भूमिका से इनकार करता रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि पाकिस्तान भारत में आतंकी गतिविधियों को शह देने का कोई मौका नहीं छोड़ता है। जाहिर है, शाहिद यूसुफ की गिरफ्तारी भर से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि आतंक के वित्त पोषण या सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें बंद हो जाएंगी। एनआइए की ताजा कामयाबी के साथ ऐसी रणनीति पर काम करने की जरूरत है कि देश में आतंकवाद को वित्तीय मदद के रास्ते स्थायी तौर पर कैसे बंद किए जाएं।