भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने हैरतअंगेज फैसला किया है। उसने अपने अध्यक्ष एन रामाचंद्रन की मौजूदगी में बाकायदा डेढ़ सौ सदस्यों की सहमति से भ्रष्टाचार के आरोप में चर्चित रहे अपने दो पूर्व अध्यक्षों- सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला- को संघ का आजीवन अध्यक्ष चुन लिया। संघ की ओर से सफाई दी गई कि पूर्व अध्यक्षों को आजीवन अध्यक्ष बनाने की परंपरा है। हालांकि उसकी आधिकारिक वेबसाइट इस तर्क को खारिज कर रही है, क्योंकि उसमें बताया गया है कि इससे पहले केवल विजय कुमार मल्होत्रा को आजीवन अध्यक्ष चुना गया था। आईओए की दलील न केवल बेदम है, बल्कि अपने बेजा काम पर परदा डालने की नाकाम कोशिश भी है। क्या परंपरा के नाम पर किसी आरोपी या दागी को इज्जत बख्शने या सहूलियतें देने को जायज ठहराया जा सकता है? यह सब तब हो रहा है कि जब अभी बीसीसीआई के मामले में सुप्रीम कोर्ट राजनीतिकों और कारोबारियों को खेल से दूर रखने की हिदायत दे चुका है।
ये दोनों व्यक्ति तो सीधे-सीधे भ्रष्टाचार के आरोप से घिरे हैं। राष्ट्रमंडल खेलों में सत्तर हजार करोड़ रुपए का घोटाला चर्चा का विषय रहा था। उस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद कलमाड़ी दस महीने जेल में रहे और फिलहाल जमानत पर हैं। 2011 में एक विकीलीक्स खुलासे में कहा गया था कि स्विस बैंक में उनके 5,900 करोड़ रुपए जमा थे। 2012 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने तो उन्हें लंदन में ओलंपिक ओपनिंग समारोह में जाने से रोक दिया था। अदालत का कहना था कि उनके वहां जाने से देश को लज्जित होना पड़ेगा। अभय चौटाला पर आय से पांच गुना अधिक संपत्ति का आरोप है। हद तो यह है कि इन्हीं चौटाला की वजह से अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने आईओए की सदस्यता ही निलंबित कर दी थी, क्योंकि उसने आरोपी व्यक्ति को मैदान में उतारा था। बाद में आईओसी ने आईओए की सदस्यता तब बहाल की, जब उसने अपने संविधान में संशोधन कर यह पक्का किया कि आगे से कोई आरोपी या दागी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यानी जिस व्यक्ति को स्वयं आईओए और आईओसी चुनाव लड़ने के काबिल नहीं समझती, उसे आजीवन अध्यक्ष बना दिया गया। क्यों?
दरअसल, खेल संघों में राजनीतिकों और पूंजीपतियों की पैठ काफी गहरी है। वजह है उनकी अपार दौलत और संबंधों की ताकत। यही वजह है कि लोकनिंदा की भी परवाह न करते हुए तमाम न्यस्त स्वार्थों वाले लोग उनके समर्थन को तैयार हो जाते हैं। इससे यह भी पता चलता है कि आरोपियों के हाथ कहां-कहां तक पहुंचे हुए हैं। हालांकि कलमाड़ी और चौटाला के चुनाव के बाद खेलमंत्री विजय गोयल ने कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है है और सरकार से बड़ा कोई नहीं है। उन्होंने आईओए के अध्यक्ष से इसकी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और वादा किया है कि उसके बाद कार्रवाई की जाएगी। बेहतर यही होगा कि इस बारे में समुचित कार्रवाई हो। और खेल मंत्रालय को भी चाहिए कि इस तरह की प्रवृत्तियों पर रोक लगाने के लिए सभी खेल संघों के लिए आचार संहिता तैयार करे। केंद्र सरकार को अपने सफाई अभियान को थोड़ा खेल संघों की तरफ भी मोड़ना चाहिए।

