नीदरलैंड की राजधानी हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत (आइसीजे) में चली सुनवाई से जाहिर है कि कुलभूषण जाधव के मामले में भारत ने अपना पक्ष बहुत मजबूती से रखा है। आइसीजे ने जाधव के कबूलनामे का वीडियो चलाने की इजाजत पाकिस्तान को नहीं दी, जिसे पाकिस्तान जाधव के खिलाफ सबसे अहम सबूत बताता आ रहा है और जिसके आधार पर उसकी सैन्य अदालत ने जाधव को फांसी की सजा सुना रखी है। वीडियो दिखाने की अनुमति न मिलना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है। गौरतलब है कि पाकिस्तान की सैन्य अदालत के फैसले के खिलाफ भारत ने आइसीजे का दरवाजा खटखटाया है। उसकी अपील पर सुनवाई पूरी हो गई है, पर अभी फैसले की तारीख तय नहीं है। सुनवाई के दौरान भारत की तरफ से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने जाधव की फांसी की सजा पर फौरन रोक लगाने तथा सजा को रद््द करने की मांग करते हुए कहा कि पाकिस्तान की सैन्य अदालत का फैसला मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय न्याय के खिलाफ है। यही नहीं, यह विएना समझौते के भी खिलाफ है जिसके तहत आरोपी को अपने बचाव का अधिकार हासिल है। फिर, जाधव के खिलाफ पाकिस्तान में चली सारी कार्यवाही कतई विश्वसनीय नहीं थी।
कबूलनामे वाले वीडियो से छेड़छाड़ की गई। जाधव को बयान देने के लिए मजबूर किया गया। उन्हें कानूनी मदद और राजनयिक पहुंच से वंचित रखा गया। उनके माता-पिता का वीजा-आवेदन भी लंबित है। ऐसा दुनिया के किसी भी सभ्य देश में नहीं होता। उनके खिलाफ तैयार किए गए आरोपपत्र की प्रति भी भारत को नहीं दी गई। जाधव की सेहत के बारे में बताना भी पाकिस्तान ने गवारा नहीं किया। उन्हें ईरान से अगवा किया गया था और ‘जासूस’ बता कर बलूचिस्तान से उनकी गिरफ्तारी दिखा दी गई। दूसरी तरफ पाकिस्तान का दावा है कि जाधव जासूसी कर रहे थे, आतंकी गतिविधियों में लिप्त थे और बलूचिस्तान से ही पकड़े गए थे। ऐसे कैदी की बाबत विएना समझौता लागू नहीं होता, न वह राजनयिक पहुंच दिए जाने के योग्य माना जाता है। इसलिए पाकिस्तान ने भारत की अपील खारिज कर देने का अनुरोध किया है। आइसीजे का फैसला कब और क्या आएगा, यह तो बाद में पता चलेगा, पर भारत की अपील एक सही कूटनीतिक कदम है।
भारत ने अंदेशा जताया है कि आइसीजे का फैसला आने से पहले ही कहीं पाकिस्तान में जाधव को फांसी न दे दी जाए। पर ऐसा शायद ही हो, क्योंकि अब इस मामले पर दुनिया भर की निगाह है, और अगर आइसीजे के फैसले की परवाह न करते हुए पाकिस्तान ने फांसी की सजा को अंजाम दिया तो उसे संयुक्त राष्ट्र के न्यायिक निकाय की तौहीन करने के लिए लांछित होना पड़ेगा और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। इसलिए भारत की तरफ से जताई गई आशंका के जवाब में पाकिस्तान ने यही कहा है कि जाधव के पास अपील करने के लिए एक सौ पचास दिनों का वक्त है। ऐसा लगता है कि भारत ने जो अंदेशा जताया है वह इस मामले में पाकिस्तान की कूटनीतिक घेराबंदी का ही हिस्सा है। आइसीजे के संभावित फैसले के अलावा पाकिस्तान में अपील की अवधि भी दोनों देशों के लिए बीच की कोई राह निकाल सकती है। जाधव के जरिए पाकिस्तान बलूचिस्तान में भारत की कथित दखलंदाजी की तरफ दुनिया का ध्यान खींचना चाहता है। पर उसके पास सारे पक्के सबूत हैं तो उसने आरोपी को राजनयिक पहुंच और कानूनी मदद से क्यों रोका, और सारी कथित अदालती कार्यवाही छिप-छिपा कर क्यों पूरी कर ली? उम्मीद की जानी चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला एक मिसाल और पाकिस्तान के लिए एक सबक साबित होगा।
