इजराइल और हमास के बीच शुरू हुए युद्ध को अब तीन महीने से ज्यादा वक्त हो चुका है। शुरुआती दौर में इस बात पर गौर किया जा सकता था कि हमास ने अपने हमले में जैसी बर्बरता का प्रदर्शन किया, इजराइल के सामने अपने बचाव में उसका जवाब देने का विकल्प नहीं था। मगर उसके बाद हमलों का सिलसिला अब तक जारी है और उसमें मारे जाने वाले आमतौर पर गाजा के वे साधारण लोग हैं, जिनका युद्ध के किसी भी पक्ष से कोई वास्ता नहीं रहा और वे दोतरफा जिद और बर्बरता के शिकार हुए।
रविवार को गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इस युद्ध में अब तक पच्चीस हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और करीब साढ़े बासठ हजार लोग घायल हुए हैं। इतनी बड़ी जनहानि के बावजूद इस युद्ध के खत्म होने या रुकने का कोई संकेत फिलहाल नहीं दिख रहा है। सवाल है कि हमास के खात्मे के घोषित मकसद के पर्दे में अगर इजराइल निर्दोष लोगों को निशाना बना रहा है, तो उसके हमले को स्वाभाविक प्रतिक्रिया कब तक माना जा सकेगा।
कोई जंग किसी मामूली कारण से भी शुरू हो सकती है और उसमें दोनों पक्षों में धीरज और दूरदर्शिता की कमी एक बड़ा कारण हो सकता है। मगर युद्ध में जितने सैनिक मोर्चे पर मारे जाते हैं, उससे कई गुना ज्यादा आम लोगों को मार डाला जाता है। कोई इसकी जिम्मेदारी नहीं उठाता। हमास ने अचानक इजराइली सीमा में घुसपैठ कर एक हजार से ज्यादा आम लोगों को मार डाला, तब उसकी बर्बरता को लेकर दुनिया भर में क्षोभ और आक्रोश पैदा हुआ और तब इजराइल के जवाब को सही ठहराने का एक कारण था। मगर उसके बाद इजराइली हमले में जितनी तादाद में आम लोगों की जान जा चुकी है, उसे कैसे देखा जाएगा?
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र की महिलाओं के लिए काम करने वाली एजंसी की एक रपट के मुताबिक इजराइल और गाजा के बीच जारी युद्ध में अब तक लगभग सोलह हजार महिलाओं और बच्चों को मार डाला गया है। इसके अलावा, इस जंग में कम से कम तीन हजार महिलाओं ने अपने पति को खो दिया और दस हजार से अधिक बच्चों के सिर से उनके पिता का साया उठ गया है।
इतने बड़े पैमाने पर मासूम लोगों के मारे जाने के बावजूद इजराइल की ओर से युद्ध को खत्म करने की तो दूर, युद्ध विराम तक को लेकर कोई संकेत नहीं दिख रहा। कुछ समय पहले एक दूसरे के अगवा किए नागरिकों और बंदी सैनिकों को छोड़े जाने के लिए तात्कालिक रूप से युद्ध को एक ठहराव दिया गया था, मगर उसके बाद फिर गोलाबारी और बेकसूर लोगों के मारे जाने का सिलसिला जारी है।
हालांकि इस बीच दुनिया भर में इस युद्ध को खत्म करने के लिए आवाजें उठी हैं। बीते शनिवार को गुटनिरपेक्ष आंदोलन के शिखर सम्मेलन में गाजा पट्टी में इजराइल के सैन्य अभियान को गैरकानूनी भी करार दिया गया और फिलीस्तीन के लोगों और बुनियादी ढांचों पर व्यापक हमलों की कड़ी निंदा की गई। मगर ऐसा लगता है कि क्रिया-प्रतिक्रिया के चरण से आगे बढ़ते हुए यह युद्ध अब जिद और अहं की शक्ल अख्तियार कर चुका है। जरूरत इस बात की है कि संयुक्त राष्ट्र और विश्व के शक्तिशाली देश इस युद्ध को खत्म करने को लेकर कोई ठोस पहल करें, ताकि नाहक निर्दोषों के मारे जाने का सिलसिला रुके।
