भारत में रेल सेवा आर्थिक विकास के साथ-साथ आम लोगों के सफर को आसान और सुगम बनाने की जीवन रेखा मानी जाती है। लंबी यात्रा के लिए रेलगाड़ियां ही एकमात्र किफायती साधन हैं। देश में रेल नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण को लेकर एक तरफ सरकार की ओर से नई-नई घोषणाएं और दावे किए जाते हैं, तो दूसरी ओर रेलगाड़ियों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव जस का तस बना हुआ है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रेलगाड़ियों में साफ-सफाई की माकूल व्यवस्था न होने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।

रेल मदद पोर्टल पर दर्ज इस तरह की शिकायतों में सितंबर 2025 की तुलना में अक्तूबर और नवंबर में लगभग पचास फीसद की वृद्धि देखी गई है। इससे स्पष्ट है कि व्यवस्थागत खामियों और सरकारी अमले में विभिन्न स्तर पर लापरवाही की वजह से यात्रियों को सफर के दौरान कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जबकि रेल किराए में सरकार जब चाहे बढ़ोतरी कर देती है। सवाल है कि किराए में वृद्धि के साथ क्या सुविधाओं में भी सुधार नहीं होना चाहिए? जब मौजूदा सुविधाएं ही बेहाल हों, तो ऐसे में आधुनिकीकरण के दावों का क्या औचित्य रह जाता है।

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गौरतलब है कि कैग की वर्ष 2018-19 से वर्ष 2022-23 की एक रपट में भी लंबी दूरी की रेलगाड़ियों में साफ-सफाई की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे। इसमें कहा गया था कि इस व्यवस्थागत खामी के लिए संबंधित अधिकारियों की लापरवाही भी जिम्मेदार है। इसके अलावा साफ-सफाई से जुड़े रेल कर्मियों का अभाव और इस कार्य के लिए साजो-सामन की कमी की ओर भी इशारा किया गया था। हालांकि रेलवे ने कुछ खास स्टेशनों पर रेलगाड़ियों के शौचालय, दरवाजे और कुछ अन्य हिस्सों की सफाई मशीनों से करने की योजना लागू की है, इसके बावजूद व्यवस्था में अपेक्षाजनक सुधार नजर नहीं आता है। रेलवे मंत्रालय की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, रेल मदद पोर्टल पर सितंबर 2025 में चादर और कंबल से संबंधित 8,758 शिकायतें मिली थीं, जो अक्तूबर में बढ़ कर 13,406 और नवंबर में 13,196 हो गईं। इसी तरह डिब्बों की स्वच्छता से जुड़ी शिकायतें सितंबर 2025 में 24,758 थीं, जो अक्तूबर में बढ़ कर 33,804 और नवंबर में 36,673 हो गईं।

हाल में सरकार ने लंबी दूरी की रेल सेवाओं का किराया बढ़ाने की घोषणा की थी। हालांकि यह वृद्धि देखने में मामूली लगती है, लेकिन देश भर में प्रतिदिन रेल में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या की लिहाज से देखें, तो सरकार को हर साल इससे करोड़ों रुपए की कमाई होगी। ऐसे में सवाल है कि क्या सरकार का लक्ष्य सिर्फ राजस्व अर्जित करना ही है? अगर ऐसा नहीं है, तो यात्रियों की सुविधाओं पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है।

रेल मदद पोर्टल पर बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर मंत्रालय ने हाल में सभी मंडलों के अधिकारियों को पत्र भेज कर व्यवस्था में सुधार करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इन निर्देशों पर कड़ाई से अमल होगा या फिर महज खानापूर्ति का ही प्रयास किया जाएगा, इसको लेकर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। यह सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि जब तक रेलगाड़ियों में साफ-सफाई और अन्य सुविधाओं को लेकर व्यापक निगरानी तंत्र विकसित नहीं किया जाएगा, तब तक समस्या के स्थायी समाधान की उम्मीद करना व्यर्थ है।