इजराइल-हमास संघर्ष रोकने की तमाम कोशिशें अभी तक नाकाम साबित हुई हैं। ऐसे में गाजा में मानवीय मदद मुहैया कराने के लिए युद्ध पर रोक और बिना शर्त बंधकों की रिहाई का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित होने से सकारात्मक नतीजे की उम्मीद बनी है। इस प्रस्ताव पर भारत ने पक्ष में मतदान किया।
इस तरह फिलिस्तीन पर इजराइल के हमले को लेकर भारत का रुख और स्पष्ट हो गया है। अक्तूबर में जब हमास ने इजराइल पर हमला किया, तो भारत ने इजराइल का साथ दिया था। तब माना जाने लगा था भारत का रुख बदल गया है। वह अपनी पुरानी फिलिस्तीन समर्थक नीति से उलट पक्ष में जा खड़ा हुआ है। तब अमेरिका और इजराइल से भारत की दोस्ती को सामने रख कर देखा जा रहा था।
कई लोगों का मानना था कि भारत इजराइल और अमेरिका के विरोध में जाएगा, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, इसलिए वह फिलिस्तीन के विरोध में खड़ा है। मगर फिर जल्दी ही भारत ने फिलिस्तीन की स्वतंत्रता और संप्रभुता की हिमायत कर स्पष्ट कर दिया था कि उसका रुख बिल्कुल नहीं बदला है। इजराइल ने गाजा पर हमले तेज किए और वहां रसद, पानी, बिजली की आपूर्ति रोक दी, तो भारत ने वहां राहत सामग्री और दवाओं की खेप भी भेजी थी।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में मिस्र द्वारा लाए गए प्रस्ताव का समर्थन कर भारत ने मानवता के पक्ष में अपनी संजीदगी जाहिर की है। इजराइल ने गाजा में भारी तबाही मचाई है और उसे युद्ध कानूनों की भी परवाह नहीं रह गई है। अस्पतालों तक को नहीं बख्शा गया है। उसमें अब तक अठारह हजार से ऊपर लोगों के मारे जाने और पैंतालीस हजार से अधिक लोगों के घायल होने का अनुमान है।
उनमें ज्यादातर बच्चे और महिलाएं हैं। गाजा में मौजूद लोगों तक सहायता सामग्री पहुंचाना मुश्किल है। बंधकों की रिहाई के प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं। इसलिए इस प्रस्ताव के पारित होने को एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। इसके समर्थन में कुल एक सौ तिरानबे सदस्यों में से एक सौ तिरपन ने मतदान किया, जबकि केवल दस देश इसके विरोध में रहे। तेईस देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। दरअसल, भारत इस बार इसलिए मतदान में शामिल हुआ कि इस प्रस्ताव में हमास का जिक्र नहीं था। यह मानवीय मदद पहुंचाने के लिए लाया गया प्रस्ताव था।
कुछ लोगों का मानना है कि प्रस्ताव का समर्थन कर भारत ने इजराइल से नाराजगी मोल ले ली है। मगर ऐसा बिल्कुल नहीं माना जाना चाहिए। भारत अब भी हमास को आतंकी संगठन मानता है। मगर वह दूसरी तरफ फिलिस्तीन की एक देश के रूप में संप्रभुता का भी वह हिमायती है। अभी गाजा में जिस तरह के हालात हैं, उसमें मानवीयता संबंधी अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन की सख्त जरूरत है।
इजराइल उस तकाजे को शायद भूल चुका है। अमेरिका भी उसे मदद पहुंचाने में जुटा हुआ है और वे हमास का खात्मा करने के एकपक्षीय लक्ष्य तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। उसमें मानवाधिकारों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन हो रहा है। भारत उसका कभी समर्थन नहीं कर सकता। इस तरह ताजा प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करके उसने इजराइल और अमेरिका दोनों को संदेश देने की कोशिश की है कि वह किसी भी तरह के आतंकवाद के विरुद्ध है, तो मानवीय हकों के हनन के भी पक्ष में नहीं है।
