निर्भया कांड की दिल दहला देने वाली घटना ने सामाजिक संवेदनाओं को पूरी तरह झकझोर दिया था। उसके बाद इस तरह के घिनौने अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए कानून को और सख्त किया गया, लेकिन जमीन पर उसका प्रभावी असर कम ही नजर आता है। हरियाणा के फरीदाबाद जिले में सोमवार की रात चलती कार में एक विवाहिता से सामूहिक बलात्कार की घटना ने एक बार फिर कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस वारदात में भी विकृत मानसिकता का बर्बर चेहरा सामने आया है। आरोपियों ने विरोध करने पर न सिर्फ पीड़ित महिला की बेरहमी से पिटाई की, बल्कि बाद में उसे चलती कार से सड़क के किनारे फेंक दिया, जिससे उसके सिर में गंभीर चोटें आई हैं। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, मगर सवाल है कि आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों के मन में कानून का खौफ क्यों नहीं है? क्या आम नागरिकों की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही सुरक्षा एजेंसियां अपने कर्तव्य का निष्ठा से पालन नहीं कर रही हैं?
गौरतलब है कि फरीदाबाद में दो आरोपियों ने देर रात किसी वाहन का इंतजार कर रही एक महिला को लिफ्ट देने के बहाने अपनी कार में बैठा लिया और उसे उसके गंतव्य तक ले जाने के बजाय गुरुग्राम की ओर ले गए तथा कार के अंदर ही उसके साथ मारपीट कर बलात्कार किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पीड़ित महिला को कई घंटे कार में घुमाते रहे और करीब तीन बजे राजा चौक के पास तेज रफ्तार कार से उसे बाहर धकेल दिया।
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हैरत की बात है कि आरोपी रातभर इस कार को सड़कों पर दौड़ाते रहे, लेकिन पुलिस के किसी गश्ती दल ने इस पर ध्यान नहीं दिया और न ही किसी नाके पर उसे रोका गया। इससे पुलिस की सजगता और सतर्कता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। चलते वाहन में इस तरह की वारदात के कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि पुलिस ने इनसे कोई सबक नहीं लिया है। वह घटना के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी पर अपनी पीठ थपथपाने में लगी रहती है, लेकिन अपराध को रोकने का दायित्व बोध कोसों दूर रह जाता है।
