आम आदमी पार्टी की सरकार के एक मंत्री को सेक्स-स्कैंडल के चलते पद से हटाया जाना कई नजरिए से बेचैन करने वाली घटना है। यह राजनीतिक सत्ता के दुरुपयोग और पतन की भी कलंक-कथा है। यह पार्टी भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उपजी थी और राजनीति का चाल, चलन और चरित्र बदलने के संकल्प के साथ उसने अपनी शुरुआत की थी। सार्वजनिक ईमानदारी और शुचिता को वह अपना मूलमंत्र मानती रही है। हालांकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जानकारी मिलते ही पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की आपात बैठक बुलाई और दागी मंत्री संदीप कुमार को मंत्रिमंडल से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। इसकी जानकारी भी उन्होंने खुद ट्वीट कर सरेआम की। उन्होंने कहा, आम आदमी पाटी न तो भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करेगी न ही चरित्रहीनता को।
गौरतलब है कि संदीप कुमार की दो महिलाओं के साथ सीडी और तस्वीरें सार्वजनिक हुई हैं। दस मिनट की सीडी में वे एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिख रहे हैं। एक अन्य महिला के साथ उनकी ग्यारह आपत्तिजनक तस्वीरें भी बरामद हुई हैं। हैरतनाक यह भी है कि बर्खास्त मंत्री के पास महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक कल्याण मंत्रालय के प्रभार थे। यह कल्पना ही की जा सकती है, जो व्यक्ति स्वयं इस तरह के कदाचार में लिप्त पाया गया है, वह इस खुलासे से पहले भी क्या-क्या करता रहा होगा।
यह बात भी इसमें जोड़ी जानी चाहिए कि संदीप कुमार पेशे से अधिवक्ता रहे हैं और दिल्ली सरकार के सात सदस्यीय मंत्रिमंडल के न केवल सबसे युवा, बल्कि दलित चेहरा भी थे। आज के दौर में जबकि राजनीति में दलितों और महिलाओं के सवाल को ज्यादा संवेदनशीलता के साथ देखा और समझा जाता है, तब एक दलित नेता का यह आचरण दूसरे लोगों के लिए किस तरह की मिसाल पेश करता है? दिलचस्प है कि हटाए गए मंत्री ने पिछले आठ मार्च यानी महिला दिवस के एक कार्यक्रम में दावा किया था कि वे रोज सुबह उठकर अपनी पत्नी के चरण छूते हैं। इस वक्तव्य ने तब बहुत सुर्खियां बटोरी थीं।
केजरीवाल ने भले ही अपने आरोपी मंत्री को निकालने में देर नहीं की और दूसरे तमाम दलों की तरह अपने दागियों को बचाने के लिए टेढ़े-मेढ़े बहाने नहीं बनाए, फिर भी यह सवाल बच रहता है कि आखिर आम आदमी पार्टी के साथ ऐसी नौबत क्यों आ रही है कि उसके मंत्री और विधायक बार-बार कठघरे में आ रहे हैं। अठारह महीने के कार्यकाल में तीसरे मंत्री को मंत्रिमंडल से हटाना पड़ा है। एक दर्जन से ज्यादा विधायक किसी न किसी मामले में जेल में हैं या जमानत पर हैं। ताजा प्रकरण का एक पहलू यह भी है कि शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने पंद्रह दिन पहले सीडी उपलब्ध करा दी थी। अगर यह दावा सही है तो कार्रवाई में देरी क्यों की गई। पार्टी या केजरीवाल कह सकते हैं कि वे इस बीच आरोप या सीडी की असलियत की जांच कर रहे थे। जो हो, सवाल है कि जो पार्टी राजनीति में एक नई बयार की तरह आई थी और जिसने काफी उम्मीदें जगाई थीं, उसका ऐसा हाल क्यों हुआ? दरअसल, पार्टी ने उम्मीदवारों को चुनने के लिए जो कसौटियां और प्रक्रियाएं तय की थीं उन्हें तिलांजलि दे दी गई और इस पार्टी में भी सुप्रीमो संस्कृति हावी हो गई। आप के एक के बाद एक मुसीबत में फंसने की मूल वजह यही है।

