यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली मेट्रो की नई लाइन यानी मैजेंटा लाइन का उद्घाटन विवाद का विषय बन गया। मैजेंटा लाइन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। लेकिन इस अवसर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को क्यों नहीं बुलाया गया? इस सवाल का कोई संतोषजनक जवाब न डीएमआरसी यानी दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के पास है, न नोएडा प्राधिकरण के पास, जिसने उद्घाटन समारोह का आयोजन किया। दरअसल, मेहमानों की सूची उत्तर प्रदेश सरकार ने तय की थी। राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रधान सचिव का कहना है कि चूंकि उद्घाटन समारोह नोएडा यानी उत्तर प्रदेश में हो रहा था, इसलिए दिल्ली के मुख्यमंत्री को बुलाना जरूरी नहीं समझा गया। लेकिन यह स्पष्टीकरण शायद ही किसी के गले उतरे। हर लिहाज से, केजरीवाल को उपर्युक्त अवसर पर बुलाया जाना चाहिए था। डीएमआरसी की वित्तीय जिम्मेदारी का एक खासा हिस्सा दिल्ली सरकार वहन करती है। इसके विस्तार की हर योजना को वह अपनी स्वीकृति देती आई है। दिल्ली मेट्रो के विस्तार का मकसद ही यह रहा है कि दिल्ली और बाकी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बीच आवाजाही आसान बनाई जा सके। मैजेंटा लाइन दिल्ली से होते हुए नोएडा और गुरुग्राम को जोड़ेगी। इस लिहाज से, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भी इस मौके पर होना चाहिए था। लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री की मौजूदगी तो एकदम जरूरी थी।

मैजेंटा लाइन नोएडा से गुरुग्राम पहुंचने से पहले दिल्ली के कई स्टेशनों से गुजरेगी। दिल्ली मेट्रो मूल रूप से दिल्ली की देन है, जिसे पड़ोसी राज्यों के यहां से सटे हुए शहरों तक बढ़ाया जा रहा है। जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और वहां के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बुलाए गए, तो केजरीवाल को क्यों छोड़ दिया गया? मेहमानों की सूची जिस सरकार ने तैयार की, वह संस्कृति-बोध से संपन्न होने का गुमान करती है। पर उसने किस संस्कृति का परिचय दिया? जो हुआ वह कायदे के विरुद्ध तो था ही, राजनैतिक शिष्टाचार के भी खिलाफ था। विडंबना यह है कि भारतीय जनता पार्टी संघीय ढांचे में यकीन करने और संघीय भावना का खयाल करने का दम भरती आई है। पर अब यह एकदम खोखला लगने लगा है। पहले भी, गणतंत्र दिवस के समारोह में केजरीवाल को न बुलाए जाने पर भाजपा की खूब आलोचना हुई थी। किरकिरी होते देख, तब केजरीवाल को ऐन वक्त पर न्योता भेज दिया गया था और फिर वे शरीक भी हुए थे।

लेकिन दिल्ली मेट्रो की मैजेंटा लाइन के उद्घाटन समारोह में उन्हें शामिल होने का न्योता भेजने की जरूरत अंत तक नहीं समझी गई। यह एक ऐसा व्यवहार है जिसके ओछेपन को किसी भी दलील से ढंका नहीं जा सकता। विचित्र है कि संघीय भावना से काम करने का दावा करने वाले लोग राज्यपाल को मनमर्जी निर्देशित करने में किसी भी हद तक चले जाते हैं, और गणतंत्र दिवस के समारोह में बंगाल की झांकी शामिल न करने में कोई संकोच नहीं करते। केजरीवाल की आलोचना का एक भी मौका न चूकने वाली कांग्रेस ने भी मैजेंटा लाइन के उद्घाटन पर दिल्ली के मुख्यमंत्री को न्योता न दिए जाने की आलोचना की है। डीएमआरसी यों तो तकनीकी और कामकाज संबंधी पहलुओं तक सीमित रहा है, पर दिल्ली मेट्रो के वित्तीय प्रबंध में दिल्ली सरकार के साझीदार होने के कारण उसे दिल्ली के मुख्यमंत्री को भी निमंत्रित किए जाने का आग्रह करना चाहिए था।