America Venezuela Controversy: अमेरिका और वेनेजुएला के बीच पिछले कुछ समय से बने तनाव का नतीजा अब भयावह रूप में सामने आ रहा है। वेनेजुएला की राजधानी काराकस शुक्रवार देर रात अमेरिका के हवाई हमलों से दहल उठी। इस अभियान के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर देश से बाहर भेज दिया गया है। इस हमले की वजह मादक पदार्थों की तस्करी बताई जा रही है।
अमेरिका का आरोप है कि वेनेजुएला नशीले पदार्थों से जुड़े आतंकवाद को सीमा पार बढ़ावा दे रहा है। मगर सवाल है कि क्या कोई शक्तिशाली देश इस तरह की समस्या से निपटने के लिए किसी छोटे और कमजोर राष्ट्र पर हमला कर सकता है? वह भी अमेरिका जैसा देश, जहां के राष्ट्रपति दुनिया के विभिन्न देशों के बीच युद्ध रुकवाने का दावा करते नहीं थकते हैं और खुद को शांति के नोबेल पुरस्कार का दावेदार घोषित कर चुके हों! ऐसे में अमेरिका की इस कार्रवाई को दोहरा मानदंड नहीं, तो और क्या कहा जाएगा।
दरअसल, अमेरिका का दावा है कि वेनेजुएला को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। यहां इस बात पर गौर करना भी जरूरी है कि अमेरिका ने वर्षों पहले इराक पर यह आरोप लगाकर हमला किया था कि वहां रासायनिक हथियारों का जखीरा मौजूद है। मगर इसका कोई स्टीक प्रमाण आज तक सामने नहीं आया है। जहां तक वेनेजुएला से अमेरिका में नशीले पदार्थों की तस्करी की बात है, तो इस मसले को द्विपक्षीय बातचीत या फिर अंतरराष्ट्रीय अदालत के जरिए सुलझाया जा सकता है।
वेनेजुएला ने तो पिछले सप्ताह अमेरिका के साथ समझौते पर बातचीत के लिए हामी भी भर दी थी। फिर क्या वजह रही कि अमेरिका ने वार्ता के बजाय हमले को चुना, इस कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कुछ लोग अमेरिका के इस हमले को वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के इरादे से जोड़कर भी देख रहे हैं।
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राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने भी पिछले दिनों एक साक्षात्कार में इस ओर इशारा किया था कि अमेरिका उनके देश में तख्ता पलट कर वहां के विशाल तेल भंडार तक अपनी पहुंच आसान बनाना चाहता है।
