कुछ जनप्रतिनिधियों को लगता है कि वे जो भी करते हैं, सब कानूनी रूप से सही होता है। अगर ऐसा न होता तो आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय यह न कहते कि वे दुबारा ऐसा करेंगे। दरअसल, मान ने अपने घर से संसद जाते समय पूरे रास्ते और संसद की कार्यवाही, यहां तक कि प्रश्नकाल की प्रक्रिया की भी विडियो बनाई और उसे फेसबुक पर डाल दिया। उनकी दलील है कि इस तरह वे आम लोगों को बताना चाहते हैं कि संसद की सुरक्षा व्यवस्था कैसी होती है और संसद की कार्यवाही किस तरह संचालित होती है। प्रश्नकाल के दौरान किस तरह सवालों का चुनाव किया जाता है और किस तरह उन पर बहस होती है। इस पर जब संसद के दोनों सदनों में हंगामा हुआ और उन्हें लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के सामने पेश होना पड़ा तो उन्होंने अपने विडियो बनाने को कानूनन सही ठहराते हुए कहा कि वे फिर विडियो बनाएंगे।
हैरानी की बात है कि उन्होंने यह जानने की कोशिश नहीं की कि क्या इस तरह संसद की तस्वीरें उतारना और सार्वजनिक करना सुरक्षा की दृष्टि से ठीक होगा। बेशक उनका इरादा लोगों को संसदीय कार्यवाही के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना रहा हो, पर उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि संसद की सुरक्षा से जुड़े कुछ नियम-कायदे हैं, जिनका हर किसी को पालन करना पड़ता है। बेशक एक सांसद होने के नाते उनके तस्वीरें खींचने पर रोक न हो, पर उन्हें ऐसा कुछ करने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए, जिससे किसी को संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने का मौका मिलता हो।
संसद पर एक बार आतंकी हमला हो चुका है, इसलिए उसकी सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्कता की दरकार रहती है। जब सांसद खुद इस तकाजे को नहीं समझेंगे, तो फिर दूसरों से क्या उम्मीद की जा सकती है। अगर संसद की कार्यवाही के बारे में लोगों को जानकारी देनी ही हो तो उससे जुड़ी बहुत सारी सामग्री लिखित और चित्र रूप में पहले से तैयार है। संसद की कार्यवाही के सीधे प्रसारण के लिए दोनों सदनों के अलग-अलग टीवी चैनल हैं, जो पूरे समय प्रसारण करते हैं। अनेक छोटी फिल्में भी बनी हुई हैं, जिनके जरिए संसद की कार्यवाही के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है। अगर लोगों को जागरूक बनाना ही था तो भगवंत मान खुद विडियो बना कर प्रसारित करने के बजाय पहले से उपलब्ध सामग्री का उपयोग कर सकते थे।
क्या संसद की सदस्यता मिलने के बाद कभी उन्होंने यह जानने की कोशिश नहीं की कि संसद परिसर में प्रवेश के बाद क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए। संसद की कार्यवाही की तस्वीरें उतारने को लेकर नियम-कायदे बने हुए हैं। फोटो पत्रकारों को इसका पालन करना पड़ता है। सांसद होने के नाते मान को संसद में फोन ले जाने की छूट होने का मतलब यह नहीं हो सकता कि वे उन नियम-कायदों को भी ताक पर रख दें। फिर संसद की कार्यवाही के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी नहीं है। उनकी जिम्मेदारी अपने इलाके की समस्याओं को सामने लाना और उनके समाधान का प्रयास करना है। अगर उन्हें लगता है कि लोगों को संसद के भीतर की गतिविधियों की जानकारी मिलनी चाहिए तो इसके लिए वे सदन के समक्ष प्रस्ताव रख सकते थे। उनका इस तरह विडियो उतारना कोई दिलेरी नहीं, बल्कि ढिठाई और नियमों का उल्लंघन है।

