कठिन परिश्रम के बिना जिंदगी में ऊंचा स्थान हासिल करना मुमकिन नहीं। समाज में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जिनसे यह बात साबित भी होती है। आज हम जिस शख्सियत के बारे में यहां जिक्र कर रहे हैं उन्होंने अपनी लगन और कड़ी मेहनत से वो मुकाम हासिल किया जिसे पाने की तमन्ना कई लोगों की होती है। हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के मेरठ से ताल्लुक रखने वाले शशांक मिश्रा की। मुश्किल हालातों से निकल कर शशांक मिश्रा ने यूपीएससी की परीक्षा में पांचवीं रैंक हासिल की है।
शशांक के घर उनके तीन भाई के अलावा एक बहन और माता-पिता थे। शशांक के पिता कृषि विभाग में डिप्टी कमिशनर के पद पर थे। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी शशांक के कंधों पर आई तो उन्होंने इसे बखूबी निभाया भी।परेशानियों से जूझते हुए शशांक मिश्रा ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा दी और 137वीं रैक हासिल भी किया। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक करने के बाद शशांक को एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी मिल गई और इस तरह शशांक पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने भी लगे।
लेकिन शशांक मिश्रा का मन नौकरी में नहीं लगा और वो प्रशासनिक सेवा में जाने का ख्वाब देखने लगे। अपने सपने को साकार करने के लिए शशांक मिश्रा ने साल 2004 में नौकरी छोड़ दी। सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए वो दिल्ली तो आ गए लेकिन दिल्ली में गुजर-बसर करना उनके लिए मुश्किल हो गया।
लिहाजा वो ट्रेन से हर रोज मेरठ से दिल्ली आने-जाने लगे। इस दौरान वो समय का सदुपयोग करते हुए ट्रेन में ही अपनी पढ़ाई-लिखाई भी करने लगे। सोच-समझकर खर्च करने के बावजूद कई बार खाने के लिये भी पैसे नहीं बचते थे। लेकिन शशांक ने हार नहीं मानी।
शशांक की मेहनत रंग लाई। पहले ही प्रयास में उनका चयन एलाइड सर्विसेज में हो गया लेकिन उन्होंने दोबारा कोशिश की और साल 2007 की परीक्षा में पांचवीं रैक हासिल कर IAS बनने का सपना साकार किया।

