मुंबई में ऐसे कई माफिया डॉन हुए जिनका सिक्का बरसों तक अंडरवर्ल्ड की दुनिया में चला। आज हम जिस महिला गैंगस्टर की बात कर रहे हैं उसे ‘माफिया क्वीन’ के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि एक वक्त था जब मौजूदा अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम भी इस माफिया क्वीन के इशारों पर ही काम करता था। इतना ही नहीं जुर्म की दुनिया में इनकी धमक इतनी ज्यादा थी कि दाउद के गुरू कहे जाने वाले हाजी मस्तान भी इसी महिला की सलामी ठोंका करते थे।
जी हां, आज हम बात कर रहे हैं जेनाबाई दारूवाली की। बताया जाता है कि जेनबााई दारुवाली का जन्म मुंबई के डोंगरी इलाके की चॉल में हुआ था। जेनाबाई का असली नाम जैनब था और वह एक मुसलमान मेमन हलाई परिवार से थी। छह भाई-बहनों के इस परिवार का गुज़र बसर करने के लिए जेनाबाई के पिता सवारियां ढोने का काम करते थे।
जैनब के जेनाबाई दारूवाली बनने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। कहा जाता है कि आजादी के बाद जेनाबाई ने डोंगरी इलाके में दारू की स्मगलिंग का धंधा शुरू किया था। धीरे-धीरे वो इस धंधे में इतनी कामयाब हुई की मुंबई और डोंगरी पर वो राज़ करने लगीं और इसी धंधे ने उन्हें नया नाम दिया जेनाबाई दारूवाली।
कहा जाता है कि 70 के दशक तक जेनाबाई अंडरवर्ल्ड की माफिया क्वीन बन चुकी थीं। जैनब से सलाह लिए बिना अंडरवर्ल्ड में एक तिनका भी नहीं हिला करता था। जेनाबाई से दाऊद इब्राहिम 20 साल की उम्र में मिले थे जहां से आज के डॉन का यह सिलसिला शुरू हुआ था। इस माफिया क्वीन को हाजी मस्तान, वरदराजन मुदलियार, करीम लाला और दाऊद इब्राहिम – मासी के नाम से बुलाया करते थे।
अनाज की तस्करी से अपने कारोबार की शुरुआत करने वाली जेनाबाई ने शराब सहित कई अवैध धंधों में अपना दबदबा बना लिया। जेनाबाई देखते ही देखते अंडरवर्ल्ड की दुनिया में जानी-मानी हस्ती हो गईं। उनकी हैसियत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुंबई के नागपाड़ा इलाक़े में स्थित उनके घर पर करीम लाल और हाजी मस्तान जैसे बड़े-बड़े डॉन आया करते थे।

