उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक गांव है ढूंसरी। साल 1989 में इस गांव का एक लड़का दिल्ली पुलिस में शामिल हुआ। कॉन्स्टेबल के पद पर भर्ती होने के बाद बलराज भाटी के परिजन खुश थे और बेटे को बधाई दे रहे थे। लेकिन अगले ही साल गांव के पोखरे में मछली मारने के विवाद में एक शख्स की हत्या हो गई और इस हत्याकांड में नाम उछला बलराज भाटी का। बलराज भाटी को जेल हो गई। जेल जाने के बाद शुरू हुई एक सिपाही के गैंगस्टर बनने की दास्तान।
जेल से छूटने के बाद बलराज भाटी एक अन्य गैंगस्टर सुंदर भाटी के गैंग में शामिल हो गया और शार्प शूटर बन गया। इसके बाद बलराज के सिर पर गांव के ही रहने वाले पप्पू उर्फ कटार सिंह से बदला लेने का जुनून सवार हो गया। इसके बाद साल 2012 में कटार सिंह और उनकी पत्नी की एके-47 से भून कर हत्या कर दी गई थी और इस हत्याकांड में नाम आया था बलराज भाटी का।
इसके बाद कटार सिंह की हत्या के चश्मदीद गुलाब सिंह की दिन दहाड़े भरी कचहरी में हत्या हुई और फिर गुलाब के भतीजे विपिन की कोतवाली से महज कुछ ही दूरी पर हत्या हो गई थी। इन दोनों हत्याकांडों में भी बलराज भाटी का नाम आया था। बलराज पर बिजनौर में नंदू उर्फ रावण, दादरी के बीजेपी नेता विजय पंडित, फरीदाबाद के रहने वाले शशि नागर समेत 3 की हत्या का भी मामला दर्ज था। देहरादून में टीटू बिल्डर की हत्या का आरोप भी उस पर था।
जरायम की दुनिया में बलराज भाटी का खौफ इस कदर था कि एक वक्त स्वर्ण व्यवसायी उसके नाम से खौफ खाते थें। कहा जाता है कि सुपारी लेकर हत्या, अपहरण और लूट जैसे जघन्य अपराधों को बलराज पलक झपकते ही अंजाम देता था। जेल में बंद अपने आका सुंदर भाटी के इशारे पर बलराज ने कई अपराधों को अंजाम दिया था लेकिन वो कभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका था। शायद यही वजह थी कि वो जल्दी ही एक बड़ा गैंगस्टर बन गया और सुंदर भाटी का दाहिना हाथ भी बन गया था।
बलराज भाटी के सिर पर हरियाणा, दिल्ली और यूपी में मिलाकर 2.5 लाख का इनाम घोषित था। इसमें से 1 लाख हरियाणा, 1 लाख दिल्ली और 50 हजार यूपी पुलिस ने घोषित किया था। साल 2018 में यूपी-हरियाणा की एसटीएफ और नोएडा पुलिस ने संयुक्त रूप से एक ऑपरेशन चलाया। इसी ऑपरेशन में बलराज भाटी पुलिस की गोलियों से मारा गया था।

