Abdul Karim Tunda acquitted in blast case: करीब 22 साल पहले हैदराबाद को दहलाने की साजिश रचने के संदिग्ध आरोपी अब्दुल करीम को अब अदालत ने सबूतों के अभाव में करीब दर्जनभर आरोपों से बरी कर दिया है। मंगलवार (03 मार्च, 2020) को नामपाली स्थित मेट्रोपॉलिटन सेशन जज कोर्ट ने अब्दुल करीम टुंडा को बरी कर दिया है।
बचाव पक्ष के वकली खालिद सैफ्फुलाह ने न्यूज एजेंसी ‘ANI’ से बातीचत करते हुए यह जानकारी दी है। यहां आपको बता दें कि अब्दुल करीम टुंडा को सुरक्षा एजेंसियों ने साल 2013 में नेपाल बॉर्डर से पकड़ा था। नेपाल से उसे पकड़ने के बाद दिल्ली लाया गया था। दिल्ली से टुंडा को बाद में हैदराबाद शिफ्ट किया गया था। इसके बाद से वो लगातार न्यायिक हिरासत में ही था।
सैयद अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को लेकर देश की सुरक्षा एजेंसियों ने शक जताया था कि वो आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा का सदस्य हो सकता है। एजेंसियों ने यह भी आशंका जाहिर की थी कि वो बम बनाने में माहिर है। हैदराबाद में गणेश उत्सव के दौरान विस्फोट की साजिश रचने के शक में उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया था और उसे गिरफ्तार किया गया था।
यह भी जानकारी दे दें कि टुंडा उन 20 आतंकियों की लिस्ट में शामिल है जिन्हें 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान सरकार को उसके हवाले करने को कहा था। बहरहाल टुंडा को अदालत ने जिन धाराओं में बरी किया है उनमें 120-B, 121, 121-A, 122, 153-A, 153-B, 420, 471, 436, 511, 428, 302, 307 और आर्म्स एक्ट समेत अन्य कई धाराएं शामिल हैं।
77 साल का टुंडा गायिजाबाद के जेल में बंद है। देश के कुछ अन्य हिस्सों में हुए बम ब्लास्ट में भी टुंडा के शामिल होने का शक है। इन मामलों से संबंधित केस अभी पेंडिंग हैं। टुंडा मूल रुप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है।
इस ब्लास्ट के बारे में पुलिस ने जानकारी दी थी कि पाकिस्तान के रहने वाले सलीम जुनैद नाम के एक शख्स को उसके 2 साथियों के साथ वर्ष 1998 में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि जुनैद ने विस्फोटक गुजरात के कच्छ से होते हुए एक टैंकर में विस्फोटक हैदराबाद तक लाए थे। इस पूरी साजिश में टुंडा भी शामिल था।
अदालत ने इस मामले में सलीम जुनैद, मोहम्मद मंसूर, फारुख अहमद, मोहम्मद उमर और मोहम्मद इस्माइल को दोषी पाया था। जुलैन अपनी सजा पूरी करने के बाद पाकिस्तान चला गया था।
