पुणे में एक कोरोना संक्रमित मरीज की मौत के बाद आरोप लग रहे हैं कि जब वो जिंदा थे तब किसी भी अस्पताल में उन्हें बेड नहीं मिल सका। यह भी आऱोप है कि जब उनकी तबीयत ज्यादा खराब हुई तब उन्हें घर से अस्पताल तक जाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं मिला। हालात यह हो गए कि कोरोना संक्रमित युवक की घर पर ही मौत हो गई और उनके शव को ठेले से ले जाना पड़ा। ठेले पर युवक के शव को ले जाते हुए एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वायरल वीडियो में नजर आ रहा है कि कोरोना संक्रमित युवक का शव ठेले पर पड़ा हुआ है और पीपीई किट पहने कुछ लोग डेड बॉडी को अंतिम संस्कार के लिए लेकर जा रहे हैं।
यह मामला पुणे के खानापुर गांव का है। बताया जा रहा है कि युवक को अस्पताल में बेड नहीं मिला तो घर पर ही उनकी मौत हुई है। गांव के सरपंच निलेश जावाल्कर ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि ‘उनकी मौत इसलिए हुई क्योंकि उन्हें किसी भी अस्पताल में बेड नहीं मिला। जब उनकी हालत काफी खराब हो गई तब उन्होंने एंबुलेंस को फोन किया लेकिन एंबुलेंस भी नहीं मिली।’
हालांकि पुणे जिला परिषद सीईओ आयुष प्रसाद ने दावा किया है कि ‘कोरोना मरीज को सांस लेने में तकलीफ होने के बाद एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया था…उस वक्त उनके कोविड रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था…लेकिन उन्होंने अस्पताल में एडमिट होने से इनकार कर दिया था और अपने घर वापस लौट गए…यह पहला केस है जब किसी मरीज की घर पर मौत हुई है।’
‘ANI’ से बातचीत करते हुए आय़ुष प्रसाद ने आगे कहा कि वो एक ऐसे जगह पर रहते थे जहां एंबुलेंस नहीं जा सकती थी। शमशान घाट उनके घर से 500-700 मीटर की दूरी पर था। कोविड मरीज की डेड बॉडी को कंधा देने की इजाजत नहीं है इसलिए उन्हें ठेले पर ले जाया गया था। इस मामले में जांच के आदेश दिये गये हैं।
मृतक युवक की उम्र 40 साल बताई जा रही है और बताया जा रहा है कि वो मछली पालन का व्यवसाय करते थे। इधर शव को ठेले पर जाने के सवाल पर स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि ‘एक मरीज के अंतिम संस्कार के लिए उचित व्यवस्था करना ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है। अभी यह पता नहीं चला है कि वह शव को ठेले पर क्यों ले गए. इसकी जांच की जा रही है।’

