झारखंड में नक्सल से प्रभावित पश्चिमी सिंहभूम में गांव के उपमुखिया समेत 7 लोगों की हत्या कर दी गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन सिलसिलेवार हत्याओं का आरोप पत्थलगड़ी समर्थकों पर लगा है। आरोप है कि पत्थलगड़ी समर्थकों की एक बैठक में विवाद के बाद इन लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। घटना जिले के गुलीकेरा ग्राम पंचायत के गांव बुरुगुलीकेरा की है।

एक भी शव बरामद नहींः मृतकों में उपमुखिया जेम्स बूढ़ समेत सात लोग शामिल हैं, वहीं दो लोगों के गायब होने की भी खबर मिली है। पुलिस ने सूचना मिलने पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत महथा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन जारी है। उनके मुताबिक अभी तक एक भी मृतक का शव बरामद नहीं हो सका है। पुलिस को सूचना मिली है कि सभी के शव जंगल में फेंके गए हैं। यह इलाका नक्सलवाद के सबसे ज्यादा पीड़ित क्षेत्रों में माना जाता है।

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जमीन की जंग में शुरू हुआ था आंदोलनः जमीन की लड़ाई को लेकर आदिवासियों ने यह आंदोलन शुरू किया था, इसका असर झारखंड में हालिया विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला। राज्य के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पत्थलगड़ी के प्रति सुस्त रवैये के चलते बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा है।

क्या है पत्थलगड़ी आंदोलनः पत्थलगड़ी का मतलब पत्थरों पर खुदाई से है। झारखंड-छत्तीसगढ़ जैसे नक्सल प्रभावित राज्यों में आदिवासियों ने यह आंदोलन चला रखा है। सबसे ज्यादा असर झारखंड के दूरस्थ इलाकों में देखा जाता है। इन इलाकों में रहने वाले लोग ‘ग्रामसभा का शासन’ ही सर्वोपरि मानते हैं। इनके लिए सरकारी आदेशों और संस्थानों की कोई मान्यता नहीं है। गांव के बाहर ही पत्थरों पर खुदवाकर शासन संबंधी नियमों की सूचना दी जाती है। इसके समर्थकों का मानना है कि वो देश के असली मालिक हैं, उन पर कोई शासन नहीं कर सकता।